हरिद्वार। नगर निगम के सहायक नगर अधिकारी पीके बंसल और वरिष्ठ वित्त अधिकारी डा. तंजीम अली के बीच खुद को ‘बड़ा’ साबित करने को लेकर तनातनी बढ़ती जा रही है। दोनों खुद को दूसरे से बड़ा बता रहे हैं। नतीजा यह है कि निगम का कामकाज प्रभावित हो रहा है। मामले की पृष्ठभूमि मेें वित्ता अधिकारी के खिलाफ की गई एक शिकायत को माना जा रहा है।
सहायक नगर आयुक्त (एसएनए) पीके बंसल ने संविदा कर्मियों के विनियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे न बढ़ा पाने का दोष वित्त अधिकारी पर मंडा है। उन्होंने बताया कि नगर आयुक्त ने 31 मार्च को संविदा कर्मियों के विनियमितीकरण के संबंध में वरिष्ठता क्रम तय करने, सुझाव और मंतव्य के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया था। लेकिन वित्त अधिकारी बैठकों में भाग नहीं लेने से सैकड़ों संविदा कर्मियों के विनियमितीकरण का महत्वपूर्ण मामला लटका हुआ है। नगर आयुक्त की ओर से गठित समिति में सहायक नगर आयुक्त पीके बंसल, वरिष्ठ वित्त अधिकारी डा. तंजीम अली, कर एवं राजस्व अधीक्षक रमेश रावत, लेखाकार चंद्रशेखर शर्मा, सुुषमा कौशिक, भूूपेश शर्मा व संजीव शर्मा को रखा गया था।
इस संबंध में वरिष्ठ वित्त अधिकारी डा. तंजीम अली का कहना है कि वे नान गजडेड (राजपत्रित) अधिकारी हूं जबकि एसएनए कनिष्ठ अधिकारी हैं। लिहाजा वह मुझे बैठक में नहीं बुला सकते। उन्होंने यह भी कहा कि नगर आयुक्त ने इस प्रकार की बैठक खुद बुलाने का निर्णय लिया था। इसके विपरीत सहायक नगर आयुक्त का कहना है कि वह क्या हैं, उन्हें इससे मतलब नहीं है। नगर निगम में तो वह ग्रेड वन लेखाधिकारी हैं और उसी के अनुसार उन्हें काम करना होगा।
दरअसल मुख्यमंत्री को प्रेषित एक शिकायत पर निदेशक (शहरी विकास) ने नगर आयुक्त से जांच कर आख्या मांगी थी। नगर आयुक्त ने निदेशक का पत्र सहायक नगर आयुक्त प्रथम को भेजा था। इस पर एसएनए ने वित्त अधिकारी स्पष्टीकरण तलब किया था। एसएनए के हवाले से इस आशय का समाचार प्रकाशित होने के बाद दोनों के बीच जंग शुरू हुई है। इसी क्रम में अब संविदा कर्मियों के विनियमितीकरण लटकने का मुद्दा उछाला गया है।
मानहानि का दावा करेेंगे तंजीम
हरिद्वार। नगर निगम के वरिष्ठ वित्त अधिकारी डा. तंजीम अली ने सहायक नगर आयुक्त पीके बंसल को न्यायालय में मानहानि का दावा करने की चेतावनी का पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में कहा है कि जिस शिकायत की जांच के संबंध में समाचार पत्रों में बयान दिया है। उस शिकायत को शिकायतकर्ता सुनील शर्मा की ओर से अपने पत्र 26 जून के माध्यम से खेद प्रकट करते हुए वापस ले लिया गया था। इसके बावजूद पीसीएस (वित्त संवर्ग) के अधिकारी से स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। यह सीधे तौर पर अपने से उच्च अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने की अनुशासनहीनता का प्रकरण है। साथ ही समाचार पत्रों में दिए गए बयानों का वैधानिक दृष्टि से उनकी सेवाओं पर प्रभाव पड़ेेगा। उन्होंने एसएनए पर छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए मानहानि का दावा करने की चेतावनी दी है।
मुख्य वित्त अधिकारी डा. तंजीम अली की गृह जिले में नियुक्ति सहित विभिन्न अनियमितताओं की मुख्यमंत्री से शिकायत करने और जांच शुरू होने पर उसे वापस लेने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसी शिकायत को सरकारी कार्य में बाधा माना जा रहा है। डीएम के निर्देश पर शिकायतकर्ता को अनुस्मारक पत्र भेजा जा रहा है। उसका जवाब संतोषजनक नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। तंजीम अली राजपत्रित अधिकारी हैं। ऐसे में शिकायत के साथ शपथपत्र देना जरूरी होता है।
-नितिन सिंह भदौरिया नगर आयुक्त।