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10 लाख श्रद्धालु करेंगे 90 फीट के झंडे जी का आरोहण

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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सहारनपुर चौक (दून) झंडा बाजार स्थित दरबार साहिब का ऐतिहासिक झंडा मेेला सोमवार से शुरू हो जाएगा। मेले का सबसे खास आकर्षण 90 फीट के झंडे जी का आरोहण छह मार्च को 10 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी में होगा। झंडा आरोहण हर साल होली के पांचवे दिन गुरु राम राय महाराज के जन्मोत्सव चैत्र वदी पंचमी (कृष्ण पक्ष) को होता है। रविवार देर शाम तक पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दरबार साहिब पहुंचते रहे। मेले में आने वाले संगतों के भोजन, ठहरने और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है।
मेले की तैयारियों के बाबत नित्य पूजा के बाद रविवार को श्री दरबार साहिब के महंत देवेंद्र दास महाराज ने संगतों को दर्शन दिए। इस दौरान उन्होंने मेले के कुशल संचालन के लिए मेला प्रबंधन व संगतों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री दरबार साहिब मेला संचालन समिति के प्रबंधक केसी जुयाल ने बताया कि संगतों के लिए एसजीआरआर बिंदाल स्कूल, एसजीआरआर बांबे बाग स्कूल, एसजीआरआर तालाब स्कूल, मातावाला बाग, राजा रोड सहित शहर की विभिन्न धर्मशालाओं और अन्य स्थानों पर समुचित व्यवस्था की गई है।
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दून के संस्थापक हैं गुरु राम राय जी महाराज
श्री दरबार साहिब का इतिहास करीब 400 वर्ष पुराना है। श्री झंडे जी मेले का इतिहास देहरादून के अस्तित्व से भी जुड़ा है। गुरु राम राय जी का देहरादून आगमन 1676 में हुआ था। उन्होंने यहां की रमणीयता से मुग्ध होकर ऊंची-नीची धरती पर जो डेरा बनाया। उसी के अपभ्रंश स्वरूप इस जगह का नाम डेरादीन से डेरादून और बाद में देहरादून हो गया। गुरु राम राय जी ने इस धरती को अपनी कर्मस्थली बनाया। इसके बाद गुरु महाराज ने लोक कल्याण के लिए एक विशाल झंडा लगाकर लोगों को इसी ध्वज से आशीर्वाद प्राप्त करने का संदेश दिया। इसी के साथ श्री झंडा साहिब के दर्शन की परंपरा शुरू हो गई। गुरु राम राय महाराज को देहरादून का संस्थापक भी कहा जाता है। वे सिखों के सातवें गुरु और गुरु हर राय जी के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका जन्म होली के पांचवें दिन 1646 को पंजाब के जिला होशियारपुर (अब रोपड़) के कीरतपुर में हुआ था।
तीन तरह के गिलाफ का होगा आवरण
गिलाफ सिलने का काम और तेज कर दिया गया है। महिलाएं सिलाई मशीन से गिलाफ तैयार करने में लगी हैं। श्री झंडे जी पर तीन तरह के गिलाफों का आवरण होता है। सबसे भीतर की ओर सादे गिलाफ (मारकीन) चढ़ाए जाते हैं। इनकी संख्या 41 होती है। मध्यभाग में शनील के 21 और बाहर की ओर एक दर्शनी गिलाफ चढ़ाया जाता है।
दूधिया रोशनी से नहाया श्री दरबार साहिब
श्री दरबार साहिब प्रबंधन की ओर से आकर्षक साज-सज्जा की गई है। खासतौर पर रात के समय श्री दरबार साहिब की आभा देखते ही बनती है। चारों ओर से पड़ रही दुधिया रोशनी के बीच श्री दरबार साहिब बेहद मनमोहक और आकर्षक दिखाई देता है।
ल्ंागर की समुचित व्यवस्था
मेला समिति की ओर से संगत के लिए 30 छोटे बड़े लंगरों की व्यवस्था की गई है। लंगर की व्यवस्था श्री दरबार साहिब परिसर, एसजीआरआर पब्लिक स्कूल तालाब, राजा रोड, बांबे बाग, बिंदाल स्कूल आदि में की गई है।

मेले में सुरक्षा के पुख्ता व्यवस्था
मेला स्थल की सुरक्षा को देखते हुए खास इंतजाम किए गए हैं। अलग से मेला थाना बनाया गया है, जो कि सोमवार से काम करना शुरू कर देगा। थाने में प्रभारी इंस्पेक्टर सहित चार एसआई और 40 पुलिसकर्मी होंगे। अप्रिय घटना से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की पांच गाड़ियां तैनात की गई हैं। मेले की सुरक्षा पर नजर रखने के लिए समिति की ओर से 40 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इसके अलावा पांच मेटल डिटेक्टर व पांच हैंड मेटल डिटेक्टर की भी व्यवस्था की गई है। सीओ सिटी चंद्रमोहन नेगी ने रविवार को मेला स्थल का मुआयना कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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बनाया गया मेला अस्पताल
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल की ओर से अस्थायी रूप से मेला अस्पताल बनाया गया है। इसमें डॉक्टरों व सहायक स्टॉफ की टीम पांच से आठ मार्च तक कार्य करेगी। अस्पताल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने बताया कि डॉक्टरों की टीम के साथ ही नर्सिंग स्टॉफ, टेक्निकल स्टॉफ ओर आवश्यक दवाओं की व्यवस्था की गई है।

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