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कांग्रेस हाईकमान से हरी झंडी: छोटी रहेगी ‘टीम प्रीतम’, 55 तक होंगे पदाधिकारी

Sat, 02 Jun 2018 10:34 AM IST
विपिन बनियाल, अमर उजाला, देहरादून
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pritam singh - फोटो : rakesh khanduri amar ujala dehradun
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थराली उपचुनाव निबटने के बाद अब ‘टीम प्रीतम’ का चेहरा सामने आने वाला है। हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।

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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की टीम छोटी होगी। सूत्रों के मुताबिक, इसमें पदाधिकारियों की संख्या 55 तक रखी जा सकती है। 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने अपनी टीम तैयार करने में साल भर का समय लिया है। कांग्रेस की आंतरिक स्थिति का सही से आकलन करने के बाद प्रीतम सिंह अपनी टीम के एलान के लिए इस वक्त को एकदम सही मान रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, नई टीम में 20 महामंत्री नियुक्त किए जा सकते हैं।

इसके अलावा, सचिवों की संख्या दस तक रखी जा सकती है। निवर्तमान कार्यकारिणी में सचिवों की संख्या डेढ़ सौ से ज्यादा थी। इसी तरह, प्रवक्ताओं की लंबी चौड़ी फौज खड़ी कर दी गई थी। प्रीतम सिंह चुनिंदा प्रवक्ता ही रखेंगे। 
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मैंने अपनी टीम को लेकर काफी हद तक होमवर्क कर लिया है। जाहिर तौर पर टीम को छोटा रखा जाएगा। कोशिश ये ही है कि छोटी टीम में हर वर्ग, क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिले और संतुलन साफ दिखाई दे।
-प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस

नगर अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों की सूची फाइनल
कांग्रेस में नए नगर अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों की सूची फाइनल कर ली गई है। ये भी संभव है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों से पहले नगर अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों का एलान कर दिया जाए। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह अब किसी भी समय निवर्तमान कार्यकारिणी भंग कर सकते हैं। इसके साथ ही नए पदाधिकारियों के नामों का एलान कर दिया जाएगा। दरअसल, प्रदेश नेतृत्व अभी तक नगर निकाय चुनाव का इंतजार कर रहा था। इरादा ये था कि नगर निकाय चुनाव निबटने के बाद पदाधिकारियों के नामों का एलान किया जाए, मगर बदली स्थिति में अब जल्द ही तस्वीर साफ होने जा रही है।
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किशोर की टीम में थे 300 से ज्यादा पदाधिकारी
प्रदेश में जिस टीम से प्रीतम सिंह वर्तमान में काम चला रहे हैं, उसमें पदाधिकारियों की संख्या 300 से ज्यादा है। अध्यक्ष रहते हुए किशोर ने संगठन में खूब पद बांटे। इसे लेकर उनकी आलोचना भी हुई। इससे पहले, यशपाल आर्य के कार्यकाल को याद करें, तो सिर्फ 33 पदाधिकारी ही उनकी टीम का हिस्सा थे। हालांकि पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय इसकी वजह साफ करते हैं। बकौल किशोर, उनके कार्यकाल में कांग्रेस ने उत्तराखंड में असाधारण सत्ता संग्राम देखा, जबकि निर्वाचित सरकार को अपदस्थ कर दिया गया। कई बडे़ नेता पार्टी छोड़ गए, लेकिन आम कार्यकर्ता कांग्रेस के साथ डटा रहा। कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए उन्हें संगठन में पद दिए गए। उस वक्त की जरूरत जंबो कार्यकारिणी थी।

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