ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य के 518 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की जिंदगी खतरे की जद में है। समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खुद शिक्षा विभाग ने इन भवनों को जर्जर और असुरक्षित करार दिया है। 1241 स्कूलों के भवनों को जल्द मरम्मत की जरूरत है। वहीं विभागीय अधिकारी बजट न होने की बात कह रहे हैं।
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में स्कूल भवन बेहद जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं, जो कभी भी ढह सकते हैं। इसके अलावा कई अन्य विद्यालय भवन ऐसे भी हैं, जिन्हें बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेशभर में 479 प्राथमिक और 39 उच्च प्राथमिक स्कूल भवन बेहद जर्जर हालत में हैं। वहीं, 1045 प्राथमिक और 196 उच्च प्राथमिक भवनों को जल्द मरम्मत की जरूरत है। टिहरी में सबसे ज्यादा 110, राजधानी देहरादून में 73, पिथौरागढ़ में 67, अल्मोड़ा में 56, बागेश्वर व हरिद्वार में 38-38 और चमोली में 23 स्कूलों की बिल्डिंग खतरे की जद में हैं। प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही एक बार फिर छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हर बार की तरह इस साल भी जर्जर और खस्ताहाल स्कूलों की सूची तैयार की जा चुकी है। सरकार ने पिछली बार भी ऐसे स्कूलों की सूची तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी थी। अपर राज्य परियोजना निदेशक, एसएसए, डॉ. मुकुल सती बताते हैं कि140 जीर्ण-शीर्ण स्कूलों के लिए 25 करोड़ 20 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। प्रत्येक स्कूल में भवन निर्माण के लिए 18 लाख रुपये दिए गए हैं। इन स्कूलों में कार्य जल्द शुरू कर दिया जाएगा। अन्य 206 स्कूलों का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
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जिलावार जीर्ण-शीर्ण स्कूल
जिला प्राथमिक उच्च प्राथमिक
अल्मोड़ा 56 01
बागेश्वर 38 02
चमोली 23 00
चंपावत 12 00
देहरादून 73 11
पौड़ी 03 01
हरिद्वार 38 03
नैनीताल 20 10
पिथौरागढ़ 67 00
रुद्रप्रयाग 08 00
टिहरी 110 07
ऊधमसिंह नगर 15 00
उत्तरकाशी 16 04
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