ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में सोमवार को जैविक संसाधनों के संरक्षण पर राज्य की पहली सात दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने हिस्सा लिया।
ग्राफिक एरा (डीम्ड टू पी यूनिवर्सिटी), ग्राफिक एरा पर्वतीय विवि और उत्तराखंड डाइवर्सिटी बोर्ड की ओर से आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने जैविक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में नई पीढ़ी को उच्च शिक्षा के साथ ही अपने राज्य के पशुु-पक्षियों और वनस्पतियों की भी जानकारी होनी चाहिए। जैव विविधिता बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी एसएस रसेली ने बताया कि इस अधिनियम के जरिये प्रदेश के साथ ही किसान और जैव संसाधन का लाभ उठा सकते हैं। जैव विविधिता अधिनियम-2002 के अंतर्गत शोधकर्ताओं, यूनिवर्सिटीज, रिसर्च लैब्स और वैज्ञानिकों को शोध संबंधी कार्य के लिए राज्य जैव विविधिता बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य है। कुलपति ग्राफिक एरा पर्वतीय विवि के कुलपति डॉ. संजय जसोला, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रुचि बडोला, जैव विविधिता बोर्ड के उप निदेशक धनंजय प्रसाद, जीबी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन इनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरएस रावल ने भी विचार रखे। वहीं पंजाब से आए सांइटिफिक ऑफिसर (पीकास्ट) के गुरहरमिंदर सिंह ने बायोडाइवर्सिटी एक्ट-2002 के आईपीआर की प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी दी। इस दौरान जैव विविधता को समझाने के लिए प्रतिभागियों को एक क्षेत्र का भ्रमण कराया गया, जहां जैविक उत्पादों, कृषि विविधता तथा बीज संरक्षण के गुर बताए गए।