ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून।
2018-19 के आम बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बढ़ोत्तरी की संभावना देख रहे लोगों को मायूस होना पड़ सकता है। इस वर्ष स्लैब में बढ़ोत्तरी होने की संभावना बेहद कम है। ढाई लाख से अधिक सालाना आय वालों को आयकर में छूट की संभावना कम है। सरकार स्लैब बढ़ाने से भविष्य में होने वाले नुकसान को देखते हुए इसमें बढ़ोत्तरी के पक्ष में नहीं है।
शनिवार को द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दून पहुंचे भारत सरकार की डायरेक्ट टैक्स इनफॉर्म कमेटी के सदस्य डॉ. गिरीश आहूजा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नए बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बढ़ोत्तरी की बहुत संभावना नहीं है। डायरेक्ट टैक्स का स्लैब बढ़ाने से सरकार को आने वाले समय में राजस्व का नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिससे निर्धारित दायरे में आने वाले हर किसी को टैक्स देना पड़ेगा। उन्होंने बेनामी संपत्ति और उसकी खरीद-फरोख्त के कानूनी पहलुओं की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जुर्माने और सजा का भी प्रावधान किया गया है।
वहीं, जीएसटी एक्सपर्ट मनोज गोयल ने जीएसटी के बाद कारोबार में आए बदलाव और इसके विभिन्न पहलूओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जीएसटी के बाद गलत ढंग से कारोबार करने वालों को नुकसान हुआ है। जीएसटी न होने से अच्छा काम करने वाली कंपनियों, ग्राहकों और सरकार को नुकसान होता है। उन्होंने व्यापारियों को जीएसटी से नुकसान की बात नकारी। उन्होंने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, वेंडिंग में लोग टैक्स नहीं देते थे, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। जीएसटी के दायरे में आने से उन्हें टैक्स देना पड़ रहा है। कार्यक्रम में क्षेत्रीय परिषद के सदस्य जीसी मिश्रा, रजत शर्मा, रजनीश जैन, रजनीश अग्रवाल, नवीन गुप्ता, संजीव गोयल, दीपक जैन, अमित खंडेलवाल, अखिल सकलानी समेत बड़ी संख्या में छात्र व बाजार से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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अभी यह है टैक्स स्लैब
सालाना आय टैक्स प्रतिशत
ढाई लाख से कम शून्य
2.5 से 5 लाख पांच
5 से 10 लाख 20
10 लाख से अधिक 30