ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में बिना काम किए ही पांच कर्मचारियों के लंबे समय से वेतन पाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि यह कर्मचारी न तो कभी विवि आते हैं और न ही अन्य कर्मचारी इन्हें जानते हैं। वहीं दूसरी ओर विवि में प्रशासनिक अधिकारी अपनी प्रतिनियुक्ति खत्म होने के बावजूद रोजाना हस्ताक्षर भी कर रहे हैं और वेतन भी पा रहे हैं। उपकुलसचिव ने पत्र लिखकर ये तमाम आरोप लगाए हैं।
292 शैक्षिक एवं गैर शैक्षिक पदों पर भर्ती मेें बाहरी व्यक्तियों के हस्तक्षेप का खुलासा होने के बाद अब ताजा मामला कर्मचारियों के बिना काम किए ही वेतन पाने का है। विवि के उपकुलसचिव डॉ.राजेश कुमार ने इस संबंध में कुलसचिव को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि विवि में परिचारक सुरजीत लाल, माली अमर सिंह, कनिष्ठ सहायक आरती, वाहन चालक अवतार सिंह और परिचारक यशपाल सिंह सेमवाल ने न तो कभी उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर किए हैं और न ही हस्ताक्षर न करने की कोई वजह बताई है। आरोप है कि इसके बावजूद उपनल के वेतन भुगतान बिलों की जांच करने पर पता चला कि इन कर्मचारियों को लगातार वेतन जारी किया जा रहा है। इससे विवि को भारी आर्थिक क्षति हो रही है। उन्होंने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी मुकुल काला की प्रतिनियुक्ति 20 नवंबर 2017 को पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद उन्हें 20 दिन का वेतन जारी किया गया है। वह रोजाना उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर कर रहे हैं। उपकुलसचिव डॉ.राजेश ने कुलसचिव प्रो.अनूप कुमार गक्खड़ से मांग की है कि इन सभी मामलों की जांच कराई जाए, ताकि विवि की छवि धूमिल होने से बच सके।
बयान::
मुकुल काला की प्रतिनियुक्ति अवधि तीन माह के लिए बढ़ चुकी है। कुलपति के अनुमोदन के बाद मुकुल काला, प्रशासिक अधिकारी पद पर कार्यरत हैं, उपकुलसचिव की जानकारी आधी-अधूरी है। बिना उपस्थिति के वेतन जारी नहीं किया जाता है। फिर भी उनके पत्र का सम्मान के साथ जवाब दिया जाएगा।
-प्रो. अनूप कुमार गक्खड़, कुलसचिव, आयुर्वेद विश्वविद्यालय
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आयुर्वेद विवि में धरने पर बैठे छात्र
- अच्छा खाना और अन्य सुविधाएं न मिलने का आरोप लगा कर रहे प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के हर्रावाला परिसर में बृहस्पतिवार को छात्रों का गुस्सा फूट गया। वह विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। देर रात तक छात्र ठंड में ठिठुरते हुए धरने पर बैठे नारेबाजी करते रहे, लेकिन कोई उनकी सुनने नहीं आया।
आयुर्वेद विश्वविद्यालय के छात्रों ने आरोप लगाया है कि न तो विवि में आज तक हॉस्टल की सुविधा है और न ही खाने की कोई सुविधा। न छात्रों के लिए खेल का मैदान और न ही पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक। आरोप लगाया कि लंबे समय से वह इन सभी समस्याओं के निराकरण के लिए विवि से मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। नाराज होकर छात्रों ने बृहस्पतिवार की शाम से विवि में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। विवि के प्रशासनिक भवन के बाहर छात्र धरने पर बैठ गए। देर रात तक छात्र ठंड में ठिठुरते हुए धरने पर बैठे रहे, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी, वह आंदोलन जारी रखेंगे।