प्रदेश के राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों को अब लेखन व कार्यालय व्यय के रूप में हर साल 50 हजार रुपये मिलेंगे। शासन में हुई बैठक में इस पर निर्णय लिया गया है।
प्रदेश के स्कूलों को अब तक लेखन व कार्यालय व्यय के रूप में हर साल 10 से 12 हजार रुपये मिलते रहे हैं, लेकिन राजकीय प्रधानाचार्य एसोसिएशन की मांग पर इसे बढ़ाकर अब पचास हजार रुपये किए जाने का निर्णय लिया गया है। अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने कहा कि बैठक में इस पर निर्णय लिया गया है कि जल्द ही इस मांग पर विचार कर लिया जाए।
सेवा विस्तार का नहीं मिलेगा लाभ
विभिन्न पुरस्कार प्राप्त प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों को उत्तरप्रदेश की तर्ज पर पांच साल की सेवा विस्तार व एक वेतन वृद्धि पर सहमति नहीं बन पाई है।
स्कूलों को लेखन व कार्यालय व्यय के रूप में 50 हजार रुपये दिए जाने पर सहमति बनी है, वहीं स्वीपर कम चौकीदार की व्यवस्था किए जाने की भी मांग की गई है। शासन की ओर से इस पर शीघ्र अमल का आश्वासन मिला है।
-एसएस बिष्ट, प्रांतीय अध्यक्ष-राजकीय प्रधानाचार्य एसोसिएशन