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गुलदार शिकार प्रकरण ने तूल पकड़ा, पीसीसीएफ से आज मिलेगा महासंघ् ा

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गुलदार शिकार प्रकरण की जांच एसआईटी व सीबीआई से हो
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राजाजी टाइगर रिजर्व में गुलदार शिकार प्रकरण तूल पकड़ता जा रहा है। मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन की रिपोर्ट पर रेेंजर व तीन कर्मचारियों को कार्यालय में संबद्ध किए जाने के बाद वन फील्ड अधिकारी कर्मचारी महासंघ ने नए सिरे से मोर्चा खोला है। महासंघ ने प्रकरण की जांच एसआईटी व सीबीआई से कराने के बाबत सोमवार को प्रमुख वन संरक्षक जयराज से मिलने का निर्णय किया है।
वन विभाग फील्ड अधिकारी, कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप पंवार का कहना है कि प्रकरण की जांच में पारदर्शिता नहीं बरती गई है। प्रकरण में अधिकारियाें, कर्मचारियों को मानसिक तौर प्रताड़ित किया जा रहा है। इससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है। ऐसे में प्रकरण की जांच एसआईटी या फिर सीबीआई से कराए जाने की जरूरत है। महासंघ ने मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन की जांच रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं।
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बता दें, राजाजी टाइगर रिजर्व में 22 मार्च को तेंदुए की खाल के साथ ही मांस, हड्डियां बरामद की गई थीं। जिसे राजाजी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वैभव कुमार की मौजूदगी में मोतीचूर बंगले में सील कर दिया गया था और फिर विस्तृत जांच पड़ताल के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजा गया था। बाद में प्रकरण की जांच कर रहे वार्डेन कोमल सिंह को हटा दिया गया और इसकी जांच नए सिरे से मुख्य वन संरक्षक मनोज चंद्रन को सौंपी गई थी। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक की रिपोर्ट पर ही रेंजर समेत तीन कर्मचारियों को हटा दिया गया था।
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निदेशक से स्पष्टीकरण मंागने पर भी सवाल
घटना के दिन पार्क निदेशक सनातन के अवकाश पर होने के बावजूद पीसीसीएफ जयराज द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने के संबंध में सवाल उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार जबकि तत्कालीन उप निदेशक वैभव कुमार से कोई स्पष्टीकरण नहीं लिया गया है। हालांकि तत्कालीन उपनिदेशक का कहना है कि वे अपना पक्ष जांच अधिकारी के सामने रख चुके हैं।
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