ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
मेजर आदित्य कुमार और उनकी टीम पर मुकदमे के विरोध में जम्मू-कश्मीर सरकार के खिलाफ बुधवार को पूर्व सैनिकों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने परेड ग्राउंड से रैली निकालकर प्रदर्शन किया। साथ ही जिलाधिकारी को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसके अलावा आर्म्स फोर्स स्पेशल एक्ट भी लागू करने को कहा, ताकि सैनिकों के खिलाफ इस तरह की घटना न हो।
गौरव सेनानी पूर्व अर्द्धसैनिक एसोसिएशन और गढ़वाल राइफल्स पूर्व सैनिक संगठन के नेतृत्व में पूर्व सैनिक परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और जम्मू-कश्मीर में गढ़वाल राइफल्स के जवानों पर केस दर्ज कराने पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि इससे जवानों का मनोबल गिरता है। उन्होंने आर्म्स फोर्स स्पेशल एक्ट (एएफएसए) लागू करने और पत्थरबाजों को कड़ी सजा देने की मांग की।
इसके बाद पूर्व सैनिकों ने प्रदर्शन करते हुए रैली निकाली, जो लैंसडौन चौक, बुद्धा चौक, दून अस्पताल, एसएसपी ऑफिस होते हुए डीएम कार्यालय पहुंची। यहां उन्होंने डीएम एसए मुरुगेशन को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने भारतीय जवानों की हिफाजत और सुरक्षा की मांग की। इस मौके पर कर्नल डीपीएस कठैत (अप्र), सूबेदार मेजर तीरथ सिंह रावत (अप्र), कैप्टन धर्मेंद्र सिंह राणा (अप्र), महावर सिंह राणा, मनवर सिंह राठौर समेत काफी संख्या में पूर्व सैनिक मौजूद रहे।
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सेना को सम्मान मिलना चाहिए। जवान आत्मरक्षा के लिए हथियार उठा सकता है, जो देश के खिलाफ कार्य करेगा, वह देशद्रोही है। सेना को कार्रवाई का पूरा हक है।
-कैप्टन धनीराम नैनवाल (अप्र)
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जवानों ने आत्मरक्षा के लिए फायर किया है तो केस नहीं होना चाहिए। इसका अन्य जवानों पर असर पड़ता है। मामले की फौज में ही जांच होनी चाहिए। सिविल पुलिस की कार्रवाई गलत है।
-कैप्टन पीएस रावत (अप्र)
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सेना वहां अपनी मर्जी से नहीं गई। केंद्र सरकार ने उसे वहां भेजा है। ऐसे में वहां की सरकार और पुलिस को कार्रवाई पत्थरबाजों के खिलाफ करनी चाहिए, सैनिकों के खिलाफ नहीं।
-कैप्टन भगवती प्रसाद बलूनी (अप्र)
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जम्मू-कश्मीर सरकार सेना का मनोबल गिरा रही है। उसे चाहिए कि वह सैनिकों के खिलाफ दर्ज केस वापस ले। सैनिकों का मनोबल ऊंचा रखने के लिए ऐसा जरूरी है।
-सूबेदार मेजर मदन सिंह (अप्र)