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अंधाधुंध भूजल दोहन के मामले में जलसंस्थान को नोटिस

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ब्यूरो/ अमर उजाला/देहरादून।
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अंधाधुंध भूजल दोहन के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जलसंस्थान को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा राज्य सूचना आयोग ने भी सूचनाएं नहीं मुहैया कराने के मामले में जिला प्रशासन को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी है। मानवाधिकार आयोग में प्र्रकरण की सुनवायी 26 मई और राज्य सूचना आयोग में 15 मई को सुनवायी होनी है।
सोशल एक्शन रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव व आरटीआई कार्यकर्ता अजय नारायण शर्मा ने राजधानी में भूजल दोहन कर उसे गैरकानूनी तरीके से बेचने को लेकर राज्यपाल, मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय, मुख्यमंत्री, सचिव पेयजल, पर्यावरण विभाग, जिलाधिकारी, मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज करायी थी। अब इस मामले मेें मानवाधिकार आयोग ने जलसंस्थान को नोटिस जारी कर 15 मई को दस्तावेजों के साथ तलब किया है। दूसरी ओर जिला प्रशासन से मांगी गई सूचना नहीं मुहैया कराने पर राज्य सूचना आयोग ने भी जिला प्रशासन से 26 मई को रिपोर्ट मांगी है। आरटीआई कार्यकर्ता अजय नारायण शर्मा का कहना है कि राजधानी मेें कुछ लोग गैरकानूनी तरीके से भूजल दोहन कर टैंकर से पानी का कारोबार कर रहे हैं। इन कारोबारियों द्वारा हर माह लाखोें की कमायी की जा रही है और पानी के एवज में कोई टैक्स नहीं जमा कराया जा रहा है।
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क्या कहता है कानून
कार्यालय अधिशासी अभियंता अनुरक्षण खंड द्वारा उपलब्ध करायी गई जानकारी के मुताबिक ‘कुमाऊं तथा गढ़वाल जल संग्रह संचय तथा वितरण अधिनियम 1976 की धारा छह में उल्लेखित प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति परगना अधिकारी की लिखित पूर्व अनुमति के बिना किसी जल स्रोत मसलन सरकारी जल प्रणाली, तालाब, जलाशय अथवा पनचक्की का निर्माण न तो करेगा और न ही पंपिंग मशीन लगाएगा। इसके अलावा बिना अनुमति के पाइप लाइन बिछाने की भी अनुमति नहीं दी जा सकती है। दूसरी ओर केंद्रीय भूजल संरक्षण प्राधिकरण एवं एनजीटी के आदेशों के अनुसार बिना अनुमति के व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता। हालांकि प्राधिकरण का यह भी कहना है कि भूजल राज्य का विषय है ऐसे में राज्य सरकार के स्तर पर ही कार्रवाई की जा सकती है।
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