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जीआईसी में फर्श पर पढ़ाई कर रहीं छात्राएं

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प्रतीकात्मक - फोटो : सोशल मीडिया
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देहरादून। सरकार की ओर से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान चलाकर तमाम दावे किए जा रहे हैं। बेटियों को बचाने व उन्हें शिक्षित बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही इस पर भारी पड़ रही है। आलम ये है कि राजधानी में स्थित ब्रह्मपुरी क्षेत्र के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की छात्राएं फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कॉलेज में छात्राओं के बैठने के लिए भी पर्याप्त कमरे नहीं हैं। प्रकरण से बाल संरक्षण आयोग को भी अवगत कराया गया है।

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एक बच्ची के परिजनों ने शिकायत की थी कि उनकी बेटी को कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इस पर मंगलवार को महिला शक्ति केंद्र की जिला समन्वयक वैभवी डोरा व लक्ष्मी चौहान राजकीय बालिका इंटर कॉलेज ब्रह्मपुरी में जांच करने पहुंची थी। वहां तमाम छात्राएं फर्श पर बैठकर पढ़ती पाई गईं। टीम ने जब बच्ची के प्रवेश न दिए जाने की बाबत पूछा तो प्रधानाचार्या अनुपमा घंसोला ने कहा कि उनके पास छात्राओं के बैठने के लिए कमरे पर्याप्त नहीं हैं। कक्षा नौ में मानक 40 की तुलना में 65 छात्राएं पढ़ रही हैं। ऐसे में अब एक भी छात्रा का प्रवेश नहीं लिया जा सकता है। जबकि बच्ची के परिजनों ने कहा कि उनकी माली हालत ठीक नहीं है, लिहाजा वह बेटी को निजी स्कूल में नहीं पढ़ा सकते हैं। प्रधानाचार्या ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में खंड शिक्षाधिकारी को पत्र भेजकर अवगत कराया है, लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। प्रधानाचार्या ने बताया कि इस संबंध में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी व सदस्य सीमा डोरा को भी ज्ञापन भेजा है। साथ ही इस संबंध में बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी क्षमा बहुगुणा को भी जानकारी दी गई है।

एक ओर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात की जा रही है, तो दूसरी तरफ छात्राओं का फर्श पर बैठकर पढ़ाई करना शर्मनाक हैं। इस संबंध में शासन व शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जा रही है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में कक्षाओं के साथ ही फर्नीचर की व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएंगी।
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- सीमा डोरा, सदस्य, उत्तराखंड बाल संरक्षण आयोग

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