ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने शिक्षा को प्राथमिकता दी। वे जानते थे कि शिक्षा के बगैर न तो दलितों को स्वतंत्रता मिलेगी और ना ही सामाजिक बुराइयों से मुक्ति। उन्होंने ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां आखिरी छोर पर खडे़ पीड़ित, शोषित, वंचित, गरीब, किसान, मजदूर और महिलाओं को बराबरी का हक और सम्मान मिले। राज्यपाल रविवार को ओएनजीसी परिसर में आल इंडिया एससी एसटी इंप्लाई एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
राज्यपाल ने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब का मानना था कि आजादी का मतलब सिर्फ अधिकार पाना नहीं है बल्कि आजादी को बनाए रखने के लिए अपने-अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी जरूरी है। डॉ. आंबेडकर ने अनुसूचित जातियों, जनजातियों और समाज के पिछडे़ वर्गों के लिए आजीवन संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों और जन-जातियों के लोगों तक सरकारी और गैरसरकारी संगठनों को जन-कल्याण के अभियानों और योजनाओं के बारे में जानकारी पहुंचानी चाहिए। कार्यक्रम में मसूरी विधायक गणेश जोशी, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डॉ. स्वराज विद्वान, ओनजीसी मानव संसाधन निदेशक अल्का मित्तल ने भी विचार रखे।