ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। पहचान पत्र (आईडी) लौटाने के बदले दून अस्पताल के ब्लड बैंक कर्मचारियों ने तीमारदारों से चाय-पानी का खर्च मांग लिया। शिकायत पर सीएमएस ने कर्मचारियों को फटकार लगाई। उसके बाद आईडी लौटाई गई।
सभी सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को मुफ्त में ब्लड मुहैया कराने का प्रावधान है, लेकिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। इसी का फायदा उठाकर कुछ कर्मचारी वसूली कर रहे हैं। पटेलनगर निवासी अमित का बेटा दून अस्पताल के निक्कू (एनआईसीयू) में भर्ती था। रात को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। डाक्टरों ने तीमारदारों को तुरंत खून की व्यवस्था करने को कहा। इस पर तीमारदार दून अस्पताल के ब्लड बैंक में खून लेने पहुंचे। साथ ही अपनी आईडी भी जमा करवा दी। बृहस्पतिवार सुबह जब तीमारदार आईडी लेने पहुंचे तो आरोप है कर्मचारियों ने उनसे पैसे मांग लिए। तीमारदारों ने पैसे न होने का हवाला दिया। इस पर कर्मचारियों ने आईडी देने से साफ इनकार कर दिया। अमित की शिकायत पर सीएमएस डॉ. मीनाक्षी ने कर्मचारी को मौके पर बुलाकर फटकार लगाई। उसके बाद कर्मचारी ने आईडी लौटाई।
आप भी जानें अपना अधिकार
खून को लेकर केंद्र सरकार ने हाल के दिनों में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अगर किसी भी सरकारी अस्पताल में कोई मरीज भर्ती है और उसे ब्लड की जरूरत पड़ती है तो निकटतम सरकारी ब्लड बैंक से मुफ्त ब्लड मिलेगा। यदि मरीज प्राइवेट अस्पताल में भर्ती है तो सरकारी अस्पताल से ब्लड लेने के लिए उसकी कीमत या फिर रक्तदाता देना होगा।
मामला संज्ञान में आने के बाद ब्लड बैंक के कर्मचारियों को फटकार लगाई गई है। साथ ही परिजन की आईडी भी वापस करा दी गई है। दोबारा ऐसी गलती करने पर कर्मचारियों को चेतावनी दे दी गई है। - डॉ. मीनाक्षी जोशी, सीएमएस, दून महिला अस्पताल