ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
प्रदेश के सीबीएसई और उत्तराखंड बोर्ड के स्कूलों में भले ही एनसीईआरटी किताबें पढ़ाने का नियम लागू हो गया हो, लेकिन अभिभावकों को पूरी तरह राहत नहीं मिल सकी है। ज्यादातर निजी स्कूलों ने रेफरेंस बुक के नाम पर एनसीईआरटी से ज्यादा मूल्य वाली निजी प्रकाशकों की किताबें लगाई हैं।
बता दें, 23 अगस्त 2017 को सरकार ने दोनों बोर्ड के विद्यालयों में एनसीईआरटी पुस्तकें लागू करने के निर्णय को मंजूरी दी थी। इससे अभिभावकों पर हर साल महंगी किताबों का बोझ कम होने की उम्मीद जगी। नए सत्र से एनसीईआरटी किताबें लागू भी हो गई हैं। इसी बीच कोर्ट ने साफ किया कि केवल वही रेफरेंस बुक्स लगाई जा सकती हैं, जिनकी कीमत एनसीईआरटी पुस्तकों के बराबर या कम हो, लेकिन कई स्कूल अभिभावकों को महंगी कीमत की किताबें खरीदने को मजबूर कर रहे हैं। वहीं, कुछ अभिभावकों ने बताया कि स्कूलों में सभी विषयों की रेफरेंस बुक्स मंगाई जा रही हैं। इसके अलावा एनसीईआरटी से इतर कई महंगी किताबें भी मंगाई जा रही हैं। वहीं मुख्य शिक्षाधिकारी एसबी जोशी ने बताया कि ऐसे मामलों की शिकायत टोल फ्री नंबर पर की जा सकती है। अप्रैल में ऐसे कुछ मामले सामने आए थे, जिसमें कार्रवाई की गई। फिलहाल ऐसा कोई मामला नहीं आया है। कोई अभिभावक शिकायत करे तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।