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महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाना पुरुषों की जिम्मेदारी : कय्यूम

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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डॉल्फिन (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज परिसर में बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देहरादून तथा डॉल्फिन इंस्टीट्यूट की ओर से बहुउद्देशीय विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान महिला सशक्तिकरण विषय पर आयोजित गोष्ठी में स्वास्थ्य, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, उरेड़ा, कृषि व राजस्व आदि विभागों के प्रतिनिधियों के अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की।
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कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तराखंड न्यायिक सेवा के सिविल जज (सी.डि.)/सचिव अब्दुल कय्यूम ने दीप जलाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने वर्ष 1987 में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य व जिला विधिक प्राधिकरण बनाया था। अब इसका विस्तार तहसील, ब्लॉक व न्याय पंचायतों तक हो चुका है। प्राधिकरण की ओर से जरूरतमंदों को नि:शुल्क कानूनी सलाह तथा वकील आदि सुविधाएं उपलब्ध कराया जाता है। सिविल जज (सी.डि.) ने कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षा व उत्थान समेत कई कानून हैं, लेकिन वास्तव में महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने की जिम्मेदारी पुरुषों को निभानी होगी। इस कड़ी में केंद्र की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओे योजना काफी सराहनीय है। इसके अलावा अधिवक्ता स्वर्ण सिंह चौहान ने महिला कानूनों की जानकारी दी और समाज कल्याण विभाग के दिनेश बिष्ट ने भी विचार रखे। इस अवसर पर संस्थान के चेयरमैन अरविंद गुप्ता, निदेशक डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्या डॉ. शैलजा पंत, विपुल गर्ग, डॉ. श्रुति शर्मा, डॉ. दीप्ति, आदित्य स्वरूप, अंकिता शर्मा, डॉ. बीना जोशी भट्ट, डॉ. सीएस पांडे, रमा गर्ग आदि मौजूद रहे।
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