ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
प्रेम और अहिंसा का संदेश देने वाले भगवान गौतम बुद्ध का जन्मोत्सव शहर में धूमधाम से मनाया गया। बौद्ध धर्म के अनुयायियों ने रैली निकाली और परेड ग्राउंड में भव्य कार्यक्रम का आयोजन कर भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस दौरान तीन लोगों को धम्मा रत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।
दून बुद्धिस्ट कमेटी और अन्य संगठनों की ओर परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तिब्बती बौद्घ समुदाय के गुरू छगुन रिंपोछे ने अनुयायियों को संबोधित कर कहा कि भगवान बुद्ध ने संसार को अपने प्रयासों से जागृत होने का संदेश दिया। उनका अंतिम और अमर संदेश अप्पो दीपों भव था। कहा कि जो व्यक्ति खुद भीतर से शांत हो जाता है। वह सृष्टि में शांतिपूर्ण तरंगें फै लाता है। आज इस भयानक एवं हिंसक दौर में भगवान बुद्ध का बताया मार्ग ही सद्भाव, प्रेम, शांति और समता प्रदान कर सकता है।
उपाध्यक्ष कसेरिंग लुडिंग ने कहा कि जैसे हजारों मोमबत्तियां एक मोमबत्ती से प्रकाशित हो सकती हैं, उससे मोमबत्ती का जीवन कभी कम नहीं होता। उसी प्रकार मनुष्य की खुशियां भी बांटने से कभी कम नहीं होती।
कलाकारों ने तिब्बत हॉग कून सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। काग्यू सेमटेलिंग ननेरी की बौद्घ साध्वियों ने वंदना की। मांडूवाला तिब्बती कॉलोनी के निवासियों ने लायन नृत्य की प्रस्तुति दी। न्यामशे कैटरीन छे के बोल वाला तिब्बती गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियां बटोरी। ऑल लद्दाखी स्टूडेंट्स यूनियन ने लद्दाखी नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके साथ ही गंगा डोलमा के गीत जहां बौद्घ, वहां शांति... ने लोगों को भावुक कर दिया। इस मौके पर दागू कुशो, खेम्पो छोकिया, खेम्पो खेन्रप, करन नोरगु, नावांक नोरबु, पादिल, जयसिंह आदि लोग मौजूद रहे।
...................
विश्व शांति के लिए जलाए एक हजार दीप
बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर बौद्घ समुदाय के लोगों ने विश्व शांति व खुशहाली के लिए 1000 दीप जलाए। मंदिरों व घरों में विधि-विधान से पूजा की जाती है। समुदाय के लोगों ने कहा कि बौद्घ भगवान के लिए सभी एक समान है उन्होंने जात-पात के भेदभाव को मिटाकर संसार को एक सूत्र में बांधा है।