ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
सांसदों के कोटे से निशुल्क यात्रा कराने के प्रकरण में उत्तराखंड परिवहन निगम के 35 परिचालकों के निलंबन का मामला मुख्यमंत्री दरबार पहुंच गया है। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजकर परिचालकों के खिलाफ महाप्रबंधक स्तर से की गई कार्रवाई में हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिषद ने यह भी कहा है कि प्रकरण में परिचालकों के स्तर से कोई गड़बड़ी नहीं की गई है, बल्कि सारी गड़बड़ी परिवहन निगम मुख्यालय के आईटी सेल की है।
बीते दिनों परिवहन निगम में सांसदों के कोटे पर निशुल्क यात्रा कराने का मामला सामने आया था। मुख्यालय स्तर से प्रकरण की जांच वित्त नियंत्रक को सौंपी गई है। इसी बीच महाप्रबंधक ने पांच नियमित और 30 संविदा परिचालकों पर कार्रवाई के लिए सहायक महाप्रबंधक को आदेश जारी कर दिए। महाप्रबंधक की इस कार्रवाई के खिलाफ परिवहन निगम के कर्र्मचारी संगठन लामबंद हो गए हैं। परिचालकों की सेवा समाप्त करने पर संगठनों नेे चक्का जाम की चेतावनी तक दे डाली।
अब यह मामला मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा गया है। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र सिंह जीना और महामंत्री रामचंद्र रतूड़ी ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि 35 परिचालकों के खिलाफ कार्रवाई पर अपने स्तर से रोक लगाएं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजकर उन्होंने तर्क दिया है कि उत्तराखंड परिवहन निगम में परिचालकों की वैसे ही कमी है। इसके अलावा चारधाम यात्रा भी शुरू हो गई है। ऐसे में निलंबित परिचालकों को बहाल किया जाना चाहिए।
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‘कार्रवाई तो आईटी सेल के अफसरों पर होनी चाहिए’
रोडवेज की बसों में सांसदों के कोटे पर निशुल्क यात्रा कराने के मामले में संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि परिवहन निगम मुख्यालय में बैठे अफसरों ने साफ्टवेयर मेें अचानक बदलाव कर दिया और इसकी जानकारी परिचालकाें को नहीं दी गई है। लिहाजा मामले में कार्रवाई तो मुख्यालय में तैनात आईटी सेल के अफसरों के खिलाफ होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अभी प्रकरण की जांच चल रही है। लिहाजा जांच पूरी हुए बगैर परिचालकों को निलंबित करना उचित नहीं है।