ब्यूरो/ आफताब अजमत, देहरादून
सरकारी विभाग हो या प्राइवेट कंपनी, सबकी क्लास लेने वाले बॉस की देहरादून में हर वीकेंड पर ‘क्लास’ लगती है। ऑफिस में हनक दिखाने वाले बॉस यहां आम भीड़ का हिस्सा होते हैं। उनसे सवाल पूछा जाता है तो जवाब देना उनके लिए मजबूरी होती है। क्लास में समय की पाबंदी और उपस्थित इतनी अनिवार्य है कि सीधे बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। हम बात कर रहे हैं आईआईएम काशीपुर के दून स्थित सैटेलाइट कैंपस में चलने वाली क्लास की। यहां तमाम सरकारी अधिकारियों के अलावा प्राइवेट कंपनियों में ऊंचे ओहदे पर काम करने वाले प्रोफेशनल हर वीकेंड पर एमबीए एग्जीक्यूटिव की पढ़ाई करने आते हैं।
उत्तराखंड में हैवी इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के जीएम शिखर सक्सेना, कानपुर में प्रभागीय वन अधिकारी सुरेश चंद्र पांडेय, बहुराष्ट्रीय कंपनी लिंडे में वाइस प्रेसीडेंट सुरेंद्र सिंह, आंध्र प्रदेश के एसएलआर इंस्टीट्यूट के मालिक एमआर यदमाकांति...ऐसे तमाम अधिकारी और प्राइवेट कंपनियों के बॉस यहां आम छात्र बने हुए हैं। एफआरआई के सभागार में वह हर वीकेंड पर क्लास में पढ़ने आते हैं। आईआईएम काशीपुर के अलावा बाहरी विशेषज्ञ शिक्षक उन्हें ज्ञान देते हैं। भले ही इन अधिकारियों के अपने विभागों या सरकार में हनक चलती हो लेकिन यहां क्लास में जब एग्जाम की कॉपी उनके हाथ में आती है तो एक युवा छात्र जैसा डर उनके चेहरे पर नजर आता है। हर शनिवार और रविवार को जब लोग परिवार के साथ घूमने या आराम के मूड में होते हैं तो इन सभी सीनियर छात्रों के दिलो-दिमाग में क्लास चल रही होती है। आईआईएम काशीपुर सैटेलाइट कैंपस के प्रशासनिक अधिकारी अमित चंदपुरिया के मुताबिक यहां हर दो सप्ताह बाद एक वीकेंड की छुट्टी होती है ताकि सभी कामकाजी छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। प्रोफेसर आरके पाढ़े के अलावा सीनियर प्रोफेसर सोमनाथ घोष सहित तमाम विशेषज्ञ छात्रों को पढ़ाने आते हैं।
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95 प्रतिशत से कम उपस्थित मतलब फेल
आईआईएम काशीपुर के एग्जीक्यूटिव एमबीए छात्रों के लिए यह कोर्स रेगुलर है। इसके नियम भी बेहद सख्त हैं। 95 प्रतिशत उपस्थित अनिवार्य है। प्रशासनिक अधिकारी अमित चंदपुरिया के मुताबिक अगर किसी छात्र ने सभी परीक्षाएं पास कर ली हैं लेकिन उसकी उपस्थिति 95 प्रतिशत से कम है तो वह फेल माना जाएगा। उन्होंने बताया कि अधिकतम आठ क्लास में अनुपस्थित रहा जा सकता है।
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आंध्र प्रदेश से हर हफ्ते क्लास
एसएलआर इंस्टीट्यूट के मालिक एमआर यदमाकांति के लिए दून से एमबीए करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। वह हर वीकेंड पर आंध्र प्रदेश से सीधे देहरादून की फ्लाइट पकड़ते हैं। हमेशा समय पर क्लास में पहुंच जाते हैं। यदमाकांति ने कोर्स के लिए सालभर की फ्लाइट टिकट बुक कराई हुई है। इसी प्रकार, कई अधिकारी चंडीगढ, पंजाब, यूपी जैसे राज्यों से भी क्लास में पहुंचते हैं। यहां एक आयकर अधिकारी भी क्लास लेती है।
इनसेट खबर ::
अब आईआईएम काशीपुर से पीजी डिप्लोमा नहीं एमबीए
26 मार्च तक कर सकते हैं एमबीए डब्ल्यूएक्स कोर्स के लिए आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
आईआईएम काशीपुर अब सभी कामकाजी लोगों को पीजी डिप्लोमा के बजाए एमबीए की डिग्री देगा। एमबीए वर्किंग एग्जीक्यूटिव (एमबीए डब्ल्यूएक्स) में दाखिले के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एक अप्रैल को एग्जाम और इंटरव्यू के बाद चयन किया जाएगा।
अभी तक देशभर के सभी आईआईएम पीजी डिप्लोमा देते थे। हाल ही में हुए एक्ट में संशोधन के बाद अब इसे एमबीए डिग्री का रूप दे दिया गया है। आईआईएम काशीपुर के देहरादून स्थित सेटेलाइट कैंपस में भी एमबीए डब्ल्यूएक्स के दाखिले शुरू हो गए हैं। प्रशासनिक अधिकारी अमित चंदपुरिया ने बताया कि इस कोर्स में दाखिले के लिए पहले तीन वर्ष का अनुभव जरूरी होता था लेकिन अब यह अवधि बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। दाखिले के लिए ग्रेजुएशन पास होने के साथ ही जॉब या अपने बिजनेस में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन कोर्सेज के लिए छात्र 26 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदनकर्ता का या तो कैट, जीमैट या जीआरई क्वालिफाई होना चाहिए या फिर आईआईएम काशीपुर की ओर से होने वाली एग्जीक्यूटिव मैनेजमेंट एप्टीट्यूड टेस्ट (ईमैट) क्वालिफाई करना होगा। ईमैट का आयोजन एक अप्रैल 2018 को किया जाएगा।
यहां लें पूरी जानकारी : www.iimkashipur.ac.in