ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
उत्तराखंड महिला मंच के 24वें स्थापना दिवस के मौके पर बुधवार को नगर निगम में आयोजित समारोह में गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किए जाने, मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को सजा दिलाने को आयोग गठित करने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई। इसके अलावा महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा की गई है।
महिला मंच की केंद्रीय संयोजिका कमला पंत ने कहा कि जब तक हम खुले दिल से राजनीति में नहीं कूदेंगे तब तक हमें बरगलाने का काम चलता रहेगा। उन्होंने महिलाओं से मजबूती से राजनीति में भागीदारी करने का आह्वान किया। मंच की संयोजिका निर्मला बिष्ट ने कहा कि जब तक सरकारी कर्मचारी अधिकारी से लेकर मंत्रियों तक के बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे तब तक प्रदेश की स्कूली व्यवस्था नहीं सुधरेगी। अनीता नौटियाल ने जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पूरा मालिकाना हक मिलना चाहिए। सरकार किसानी करती महिलाओं को महिला किसान का दर्जा प्रदान करे। वहीं, प्रदेश में हिमाचल की तर्ज पर भू अधिग्रहण नीति लागू हो। मंच से जुड़ी गीता गैरोला ने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों के दौरान यदि महिलाओं के साथ हिंसा होती है तो उस थाने के संबंधित अधिकारी को निलंबित किया जाए उसके निलंबन के बाद ही मामले में जांच बैठाई जाए। राज्यश्री रावत ने कहा कि हमें क्यूबा जैसे छोटे देशों से सीखने की जरूरत है, जहां एक मेडिकल स्कूल में सरकार सारे बच्चों का खर्चा सिर्फ इस शर्त पर उठाती है कि वे वापस अपने गांव जाकर अपने गांव के लोगों का मुफ्त इलाज करेंगे। समारोह में विभिन्न छह प्रस्तावों पर चर्चा कर उन्हें पास किया गया। समारोह में ऊषा भट्ट, भुवनेश्वरी कठैत, शकुंतला गुसांई, आशा जुगरान, अनीता नौटियाल, किरण पुरोहित, यशोदा रावत, प्रीति थपलियाल, विजया नैथानी, बीना डंगवाल, पूनम त्यागी, सरोज उनियाल, कुसुम भट्ट, डा. मंजू बलोदी, चंद्रा भंडारी, संगीता, विमला, सुशीला अमोली, मनोरमा नेगी, शशिकला पुरी आदि मौजूद रही।