अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा 9 जुलाई से प्रारंभ होगी। अलबत्ता हरिद्वार में कांवड़ियों की चहल पहल अभी से दिखाई पड़ने लगी है। यह कांवड़िए मुख्यत: राजस्थान के दूर दराज के इलाकों से आए हैं। कांवड़ियों का आगमन अब दिनों दिन बढ़ता जाएगा।
मध्य प्रदेश और राजस्थान के दूरस्थ इलाकों से आने वाले कांवड़िये श्रावण के पहले दिन ही वापस लौटने लगते हैं। पिछले दो तीन वर्षों से ये कांवड़िये चारधाम की यात्रा पर भी जाने लगे हैं। आज शनिवार को करीब 200 की संख्या में कांवड़िए गंगा जल भरने पहुंचे। अगले दिनों में इनकी संख्या बढ़ने लगेगी। ये कांवड़िये उत्तराखंड के चारधाम अथवा दो धाम की यात्रा पर जाएंगे और लौटते हुए गंगोत्री में रुकेंगे। गंगोत्री में रुककर ये गंगोत्री अथवा गोमुख से गंगा जल भरेंगे। कांवड़ियेे गुरु पूर्णिमा के दिन हरिद्वार लौटेंगे और अगले दिन सवेरे ही जल भरकर वापस लौट जाएंगे। राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश से भी ऐसे कांवड़ियेे अब पहुंचने वाले हैं। बहुत से कांवड़ियेे केवल बद्रीनाथ की यात्रा पर जाते हैं, वे चार दिन बाद हरिद्वार आएंगे। जिन यात्रियों को गंगोत्री से कांवड़ उठानी है, वे श्रावण लगने से दो दिन पूर्व हरिद्वार में डेरा जमाकर गंगोत्री चले जाएंगे।
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा अब काफी नजदीक आ गई है। हरि शयनी एकादशी के बाद हरिद्वार के बाजारों में कांवड़ की रौनक भी शुरू हो जाएगी। राजस्थान से आए कांवड़ियेे कुछ तो पहले श्रावण को पैदल लौटेंगे और कुछ वाहनों में ही चले जाएंगे। जिन कांवड़ियों को वापसी यात्रा पैदल करनी है, वे साथ लाए हुए वाहन पहले ही वापस भेज देंगे।