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कांवड यात्रा की तैयारी में बाजार

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कौशल सिखौला
हरिद्वार।
श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के लिए धर्मनगरी में तैयारियां पूरी हो गई हैं। प्रशासन जहां रूट तैयार करने में उलझा हुआ है, वहीं व्यवसाय जगत और होटलों का स्वरूप बदलने के लिए तैयार है। कांवड़ियों के लिए अधिक से अधिक सामान जुटाए जा रहे हैं। होटलों के कई कमरों से बेड निकालकर उनमें दरियां बिछाई जा रही हैं। होटलों के आधे हिस्से को धर्मशाला के रूप में बदलकर कांवड़ कमाने का सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है। साथ ही हरिद्वार के व्यवसायी भी 15 दिनों के लिए अपने कारोबार बदलने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
इस बार कांवड़ का मेला नौ जुलाई के पूर्णिमा स्नान से शुरू होगा। पूर्णिमा को पहुंचे कांवड़िये अगले दिन सावन लगते ही कांवड़ भरकर रवाना हो जाएंगे। कांवड़ मेले के लिए सबसे बड़ी जरूरत आवासीय कमरों की पड़ती है। हरिद्वार में कुल मिलाकर होटलों, धर्मशालाओं, आश्रमों और लॉजिंग हाउस में पांच लाख से अधिक बेड उपलब्ध हैं। कांवड़ियों को बेड वाले कमरों में कोई ठहराना नहीं चाहता। इसका कारण उनका दर्जनों की संख्या में पहुंचना है और दरी वाले कमरों की मांग करते हैं। ऐसे में होटल वाले बेड निकालकर कमरों में दरी बिछा रहे हैं। सबकी नजरें कांवड़ मेले में आने वाले करीब दो करोड़ यात्रियों पर लगी है।
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इन कांवड़ियों से हरिद्वार का व्यवसाय जगत प्रतिवर्ष 15 दिन में ही करोड़ों कमा लेता है। यही कारण है कि इन दिनों बहुत से लोग महीने डेढ़ महीने के लिए ब्याज पर उधार लेकर भी कांवड़ का सामान भरने में जुटे हैं। हजारों छोटे व्यापारी कांवड़ के बाजार से चंद ही दिनों में लाखों कमा लेते हैं।
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कांवड़ के दिनों में पतंद्वीप पर कांवड़ बाजार आवंटित किया जाता है। बावजूद इसके कांवड़ का बाजार समूचे भीमगोड़ा, खड़खड़ी, अपर रोड, रेलवे रोड, बड़ा बाजार, मोती बाजार, विष्णु घाट, रामघाट, बिरला रोड आदि पर भी खुल जाता है। मायादेवी के विशाल मैदान के साथ-साथ रोडीबेलवाला के मैदान में भी सैकड़ों दुकानों वाला बाजार सजता है। दुकानों के साथ-साथ घरों में भी व्यापारी माल भर रहे हैं ताकि ट्रैफिक बंदी के दौर में इधर-उधर न भागना पड़े। ऐसी कोई भी दुकान पर नहीं होगी जिसके बाहर कांवड़ का बाजार न लग गया हो। कांवड़ के मेले के लिए ज्वालापुर के अनेक मोहल्लों में खासी रौनक है। यहां कांवड़ तैयार करने के काम में सैकड़ों मुस्लिम परिवार महीने भर से जुटे हुए हैं।
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