बदरीनाथ हाईवे पर नासूर बना लामबगड़ का भूस्खलन आस्था पर भारी पड़ रहा है। लामबगड़ में हाईवे के बार-बार अवरुद्ध होने से विभिन्न प्रांतों के तीर्थयात्रियों की ओर से बदरीनाथ धाम में प्रस्तावित धार्मिक कथाओं का आयोजन निरस्त करना पड़ा है। धाम में इसी माह में 26 छोटी-बड़ी भागवत कथाओं का आयोजन होना था।
बदरीनाथ हाईवे अगस्त माह से लामबगड़ में तीर्थयात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। यहां बिना बारिश के भी चट्टान से मलबा और बोल्डर हाईवे पर आ रहे हैं। छह अगस्त को लामबगड़ में एक यात्री बस के ऊपर भारी बोल्डर गिरने से पांच तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि तीन घायल हो गए थे। 17 सितंबर को लामबगड़ में दलदल में फंसी कार के ऊपर बोल्डर गिरने से कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। तीर्थयात्रियों ने भागकर अपनी जान बचाई। लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की पैदल आवाजाही करवाई जा रही है।
इस वर्ष तीर्थयात्रियों की ओर से बदरीनाथ धाम में श्रीमद्भागवत कथाओं का आयोजन प्रस्तावित था। 19 सितंबर को हंस उत्तराखंड धर्मशाला में मध्य प्रदेश के तीर्थयात्रियों की भागवत कथा प्रस्तावित थी, जबकि दो सितंबर से जैन धर्मशाला में जयपुर के तीर्थयात्रियों की कथा होनी थी। साधु सुधा आश्रम में भी 15 सितंबर से श्रीमद्भागवत कथा होनी थी।
कुल मिलाकर 26 छोटी-बड़ी भागवत कथाओं का आयोजन धाम में होना था, जो बदरीनाथ हाईवे की बदहाली के चलते निरस्त कर दी गईं। बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि बदरीनाथ हाईवे के लामबगड़ में बार-बार अवरुद्ध होने से तीर्थयात्रियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। लामबगड़ भूस्खलन जोन की वजह से ही बदरीनाथ में कई कथाओं का आयोजन भी निरस्त हो गया है।
सरकार को लामबगड़ का स्थायी हल निकालना चाहिए। धार्मिक कथाओं के निरस्त होने से बदरीनाथ धाम में आचार्य पंडितों के साथ ही व्यवसायी भी खासे चिंतित हैं। टेंट कारोबारी नवीन का कहना है कि कई तीर्थयात्रियों की ओर से जुलाई माह में ही कथा आयोजन के लिए टेंट की एडवांस बुकिंग की गई थी, लेकिन हाईवे की बदहाल स्थिति के कारण यात्रियों को कथाओं का आयोजन निरस्त करना पड़ा है।