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26/11 हमले में जान पर खेलकर लोगों को बचाने वाले ब्रिगेडियर ने बताया पूरा सच, बोले ऐसा न करते तो...

Mon, 26 Nov 2018 08:16 AM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
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26/11 mumbai attack - फोटो : PTI
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मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले से निपटने की रणनीति एनएसजी की टीम ने दिल्ली से मुंबई की उड़ान के दौरान ही बना ली थी। हमारे के लिए सबसे बड़ी चुनौती होटल में मौजूद मेहमानों की रक्षा करते हुए आतंकियों को मारना था। अगर उस वक्त ऐसा न करते तो जो बचा उसे बचा पाना भी मुश्किल था।

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यह कहना है 26/11 आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की कमान संभालने वाले तत्कालीन एनएसजी डीआईजी ब्रिगेडियर गोविंद सिंह सिसौदिया का। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर इस हमले के बाद पूरी दुनिया एकजुटता से आतंक के खिलाफ खड़ी हुई।

दून के सीमाद्वार निवासी ब्रिगेडियर सिसौदिया का कहना है कि आज मुंबई हमले को एक दशक पूरा हो गया। हमले की सूचना के बाद हमें अपनी टीम को मानेसर से दिल्ली होते हुए मुंबई ले जाना था। उड़ान भरने से पहले ही हमने प्राथमिक सूचनाएं एकत्र कर लीं थी।

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ब्रिगेडियर गोविंद सिंह सिसौदिया
उड़ान के दौरान दो घंटे में हमने हमले से निपटने की रणनीति भी बना ली थी। ब्रिगेडियर सिसौदिया ने कहा कि जब वे मुंबई पहुंचे तो चौबीस घंटे चलते रहने वाला शहर खामोश था। सड़कों पर सन्नाटा था। मौके पर पहुंचे तो वहां मौजूद अफसरों ने पूरा मामला समझाया।

अब चुनौती यह थी कि होटल में मौजूद आतंकियों से निपटने के साथ ही करीब 600 कमरों में फंसे निर्दोष लोगों को भी बचाना था। इस चुनौतीपूर्ण काम में निश्चित तौर पर समय लगना ही था। उन्होंने कहा कि जो लोग सवाल उठाते हैं कि ऑपरेशन में लंबा समय लगा था, वह गलत हैं। वहां आम जन को बचाना था। ब्रिगेडियर सिसौदिया की टीम ने अपनी जान पर खेलकर होटल ताज ओबेरॉय और नरीमन प्वाइंट से आतंकवादियों का सफाया कर दिया था।
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दून के गजेंद्र बिष्ट सहित दो हुए थे शहीद

26/11, mumbai attack - फोटो : Amar Ujala
जवाबी हमले में शहीद हुए अपनी टीम के सदस्यों मेजर उन्नीकृष्णन और गजेंद्र सिंह बिष्ट को याद करते हुए ब्रिगेडियर सिसौदिया को आज भी बहुत दुखी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व भी है कि उन्होंने देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किए।

बदल गए देश-दुनिया के हालात
ब्रिगेडियर सिसौदिया का कहना है कि 26/11 आतंकी हमले के बाद आतंकवाद को पूरी दुनिया ने माना। पूरी दुनिया ने माना कि इसके खिलाफ एकजुटता के साथ लड़ाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार की विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय नहीं होता था, लेकिन इस ऑपरेशन के बाद से ही समन्वय बढ़ गया। खुफिया एजेंसियों की सूचनाएं भी साझा होने लगीं। कई राज्यों ने अपनी कमांडो फोर्स बना ली है।
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