ब्रिगेडियर गोविंद सिंह सिसौदिया
उड़ान के दौरान दो घंटे में हमने हमले से निपटने की रणनीति भी बना ली थी। ब्रिगेडियर सिसौदिया ने कहा कि जब वे मुंबई पहुंचे तो चौबीस घंटे चलते रहने वाला शहर खामोश था। सड़कों पर सन्नाटा था। मौके पर पहुंचे तो वहां मौजूद अफसरों ने पूरा मामला समझाया।
अब चुनौती यह थी कि होटल में मौजूद आतंकियों से निपटने के साथ ही करीब 600 कमरों में फंसे निर्दोष लोगों को भी बचाना था। इस चुनौतीपूर्ण काम में निश्चित तौर पर समय लगना ही था। उन्होंने कहा कि जो लोग सवाल उठाते हैं कि ऑपरेशन में लंबा समय लगा था, वह गलत हैं। वहां आम जन को बचाना था। ब्रिगेडियर सिसौदिया की टीम ने अपनी जान पर खेलकर होटल ताज ओबेरॉय और नरीमन प्वाइंट से आतंकवादियों का सफाया कर दिया था।
जवाबी हमले में शहीद हुए अपनी टीम के सदस्यों मेजर उन्नीकृष्णन और गजेंद्र सिंह बिष्ट को याद करते हुए ब्रिगेडियर सिसौदिया को आज भी बहुत दुखी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व भी है कि उन्होंने देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किए।
बदल गए देश-दुनिया के हालात
ब्रिगेडियर सिसौदिया का कहना है कि 26/11 आतंकी हमले के बाद आतंकवाद को पूरी दुनिया ने माना। पूरी दुनिया ने माना कि इसके खिलाफ एकजुटता के साथ लड़ाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार की विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय नहीं होता था, लेकिन इस ऑपरेशन के बाद से ही समन्वय बढ़ गया। खुफिया एजेंसियों की सूचनाएं भी साझा होने लगीं। कई राज्यों ने अपनी कमांडो फोर्स बना ली है।