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उत्तराखंड की आबोहवा में भी घुल रहा 'जहर', सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

Sun, 25 Nov 2018 10:01 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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air pollution - फोटो : demo pic
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दिल्ली जैसे बड़े शहर में ही नहीं उत्तराखंड जैसे शांत वादियों वाले राज्य की हवा में भी अब जहर घुल रहा है। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था गति व प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ की संयुक्त बैठक में विशेषज्ञों ने रिपोर्ट पेश की है कि देश के अन्य राज्यों की तर्ज पर देवभूमि की भी आबोहवा तेजी से बदल रही है।

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‘इंडिया स्टेट लेवल डिजीज बर्डन इनीसिएटिव’ रिपोर्ट का हवाला देते हुए बैठक में गति फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने कहा कि उत्तराखंड में हर साल 65,000 लोगों की मौत होती है, जिनमें से 6000 की मौत होने की प्रमुख वजह प्रदूषण है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर प्रदूषण का असर ज्यादा होता है। गांधी शताब्दी अस्पताल के सभागार में आयोजित डॉक्टरों की बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि अगर समय रहते प्रदूषण रोकने को लेकर कारगर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो सकती है।

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बैठक में डॉ. रिमांत गुप्ता ने कहा कि, 'विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में हर साल 80 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है। दुनिया में प्रदूषण के लिहाज से सबसे खतरनाक 14 शहर भारत में हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर का श्रीनगर भी शामिल है, जो कि पर्वतीय इलाका है। देश में विभिन विभागों को एकजुट होकर वायु प्रदूषण के खिलाफ  कारगर कदम उठाने की जरूरत है।'

गांधी शताब्दी अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने गति फाउंडेशन के प्रयासाें की सराहना करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट से साफ हो गया है कि अब उत्तराखंड समेत देश के अन्य हिमालयी राज्योें में भी प्रदूषण का खतरा साल दर साल बढ़ रहा है। 

बैठक में पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अल्मोड़ा डॉ. एलएमएस उप्रेती, पीएमएस एसोसिएशन के डॉ. डीपी जोशी, डॉ. अमित जैन, डॉ. जेपी नौटियाल, डॉ. एनके मिश्रा, समाजसेवी रवींद्र जुगरान के अलावा अस्पताल के कर्मचारी व दून विवि के छात्र शामिल थे। 
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