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मादा किंग कोबरा छोड़ गई घोंसले में 24 बच्चे

Sun, 23 Aug 2015 01:53 PM IST
ब्यरो/अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून के सहस्त्रधारा में करीब डेढ़ माह पहले पाए गए किंग कोबरा के अंडों में से 24 बच्चे बाहर निकले हैं। शनिवार को जैसे ही किंग कोबरा के घोंसले से बच्चे बाहर निकलने शुरू हुए उन्हें पकड़कर सुरक्षित चीला रेंज के जंगल में छोड़ दिया गया। बीती 9 जुलाई को ‘अमर उजाला’ में ‘सहस्त्रधारा में किंग कोबरा का घोंसला’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद से वन विभाग और इफेक्ट संस्था घोंसले की निगरानी में जुटे थे।
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उल्लेखनीय है कि वन्य जीव एवं सरीसृप विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सिंह ने मसूरी वन प्रभाग के सहयोग से पहली बार गढ़वाल मंडल में सहस्त्रधारा के निकट किंग कोबरा का आशियाना 9 जुलाई को चिह्नित किया था। इससे पहले सात वर्ष पूर्व कुमाऊं मंडल में वैज्ञानिकों ने किंग कोबरा का घोंसला खोजा था। अब तक इसका घोंसला घने जंगलों में पाया जाता रहा है।

बीती 9 जुलाई को सहस्त्रधारा के निकट एक गांव की पगडंडी पर मिले करीब एक वर्गमीटर चौड़े और एक मीटर ऊंचे घोंसले में मादा किंग कोबरा अंडे देकर जा चुकी थी।

खूब एक्टिव थे बच्चे, पकड़कर बाल्टी में रखे गए

वन विभाग और इफेक्ट संस्था की टीम ने इस घोंसले के चारों ओर तारबाड़ की थी। इसके साथ ही वन विभाग का एक कर्मचारी मौके पर तैनात कर दिया गया था। शनिवार को सुबह अचानक अंडों से बच्चे बाहर आने लगे। वन विभाग और संस्था के कर्मचारी मौके पर पहुंचे।

उन्होंने सभी बच्चों को पकड़कर एक बाल्टी में रखना शुरू कर दिया। बच्चे काफी एक्टिव थे। गिनती करने पर इनकी संख्या 24 पाई गई। पांच अंडे खराब हो गए थे। बताया गया कि बच्चे अंडे से निकलते ही बाहर भागते हैं, लिहाजा वन विभाग ने घोंसले के चारों ओर जाली लगाई हुई थी।

बाद में किंग कोबरा के बच्चों को एसडीओ मसूरी सहित वन विभाग के कई अधिकारियों की निगरानी में चीला रेंज की ओर जंगल में छोड़ दिया गया। इस मौके पर डीएफओ मसूरी धीरज पांडे के अलावा वन विभाग के कई अधिकारी और संस्था की ओर से सुधाकर शर्मा, अंकित पुरी, दीपक कुमार, वैभव कुमार सिंह (आईएफएस 2015 बैच) सहित कई अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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दुनिया में कुछ ही जगह पाया जाता है यह दर्लभ सांप

किंग कोबरा भारत के पश्चिमी घाट, कर्नाटक, गोवा, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों के अलावा बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार तक पाया जाता है।

विदेशों में यह दुर्लभ प्रजाति का सांप बांग्लादेश, भूटान, नेपाल से लेकर फिलीपींस तक पाया जाता है। इसकी लंबाई करीब 15 फिट तक होती है। यह साल में एक बार अंडे देती है। डॉ. अभिषेक सिंह ने बताया कि यह एकमात्र ऐसा सांप है, जिस पर दक्षिणी भारत में रेडियो कॉलर लगाकर रिसर्च की गई है।

बड़ी कामयाबी
वन विभाग और वन्य जीव विशेषज्ञ इसे एक बड़ी कामयाबी मानकर चल रहे हैं। अब तक आवासीय क्षेत्रों में अपेक्षाकृत इसकी पहुंच कम थी। माना जा रहा है कि आबादी के निकट किंग कोबरा का घोंसला इसके प्रवास के बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
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