अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के रेगुलर ऑडिट में चार और अस्पतालों में गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। इनमें देहरादून के भी अस्पताल बताए जा रहे हैं। जल्द इनके नामों का खुलासा हो है। अब तक गड़बड़ियां सामने आने पर चार अस्पतालों पर कार्रवाई हो चुकी है। इनमें दो अस्पताल हरिद्वार और दो अस्पताल काशीपुर के शामिल हैं।
इस योजना के लिए प्रदेश के निजी अस्पतालों को दिसंबर 2018 से सूचीबद्ध किया गया था। उसी समय से कुछ अस्पतालों ने इससे काली कमाई करने की जुगत लगानी शुरू कर दी थी? इसी क्रम में कुछ चिकित्सकों ने खुद को निजी अस्पताल में भी काम करना दर्शाया। जबकि वे पहले से संविदा पर सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे थे। इसी की आड़ में वे लगातार सरकारी अस्पतालों से मरीजों को अपने अस्पतालों में रेफर करते रहे और तरह-तरह के पैकेज में मरीजों का इलाज दिखाकर मोटी राशि हड़पते रहे।
बीते एक अप्रैल से इन निजी अस्पतालों का ऑडिट शुरू हुआ तो कई गड़बड़ियां सामने आई। इसमें सबसे पहले काशीपुर के एक अस्पताल का नाम सामने आया। अस्पताल का मालिक एक सरकारी अस्पताल में संविदा पर तैनात था। उसने एक ही परिवार के नौ लोगों का इलाज लगभग एक ही पैकेज में कर डाला। इस तरह उसने तकरीबन प्रदेश सरकार को 10 लाख रुपये की चपत लगाई। उसके बाद रेगुलर ऑडिट में गड़बड़ी पर गड़बड़ियां सामने आती गईं। हरिद्वार के एक अस्पताल ने 56 मरीजों की आंखों का इलाज दर्शाकर लाखों रुपये अंदर किए। प्राथमिक जांच के बाद इन अस्पतालों पर फौरी कार्रवाई करते हुए इन्हें सूची से निलंबित कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक अब चार और अस्पतालों में इसी तरह के मामले पकड़ में आए हैं। पहली बार इसमें राजधानी देहरादून के अस्पतालों का नाम भी सामने आया है। जल्द इनके नामों का खुलासा कर इन्हें सूची से बाहर किया जाएगा।
संविदा चिकित्सकों पर होगी कार्रवाई
अब तक काशीपुर और हरिद्वार के एक-एक संविदा डॉक्टर का नाम सामने आया है। इन डॉक्टरों ने खुद को संविदा डॉक्टर तो दर्शाया ही था, लेकिन जांच में पता चला कि इन्होंने खुद को निजी अस्पतालों में भी 24 घंटे काम करना दिखाया है। इस पर स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ रविंद्र थपलियाल का कहना था कि संविदा चिकित्सक ड्यूटी आवर्स में किसी अस्पताल में काम नहीं कर सकता। मसलन यदि सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक वह किसी सरकारी अस्पताल में ड्यूटी दे रहे हैं तो उसकी 24 घंटे की वह घोषणा स्वत: मिथ्या साबित हो जाती है। लिहाजा ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होना तय है।