ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राजपुर स्थित मसीही ध्यान केंद्र में एससीईआरटी की ओर से आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन शनिवार को हो गया। कार्यशाला के दौरान लोक संगीत के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने के लिए बच्चों को मातृभाषा में गीत रचने के गुर सिखाए गए। कार्यशाला में अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण की निदेशक सीमा जौनसारी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
इस अवसर पर सीमा जौनसारी ने लोक संगीत को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। डॉ. मोहन बिष्ट ने कहा कि रेडियो के माध्यम से लोक संगीत की सामग्री का प्रचार प्रसार करना चाहिए। एससीईआरटी की सहायक निदेशक पुष्पा जोशी ने कहा कि लोक संगीत की सामग्री से शिक्षण रोचक तो बनेगा ही साथ ही हमारी लोक विरासत देश विदेश में प्रसिद्ध होगी। कार्यशाला के समन्वयक डॉ. नंद किशारे हटवाल ने बताया कि पांच दिन तक चले कार्यशाला में बच्चों द्वारा उत्तराखंड के आभूषण, वेशभूषा, मेले उत्सव, नदियां, जीव जंतु आदि पर गीत तैयार किए गए हैं। जल्द ही गीतों को संगीतबद्ध करके आडियो तैयार कर यूट्यूब और एससीईआरटी की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। इस अवसर पर मनोरमा बर्त्वाल, नंद किशोर हटवाल, डॉ. उमेश चमोला, डॉ. रमेश पंत, अवनीश उनियाल, डॉ. बिंदू नौटियाल, देवेश जोशी, गिरीश सुंदरियाल, हरीश जुयाल कुटज, धमेंद्र नेगी, शैलेेंद्र तिवारी, सुधीर बर्त्वाल, नवीन डीमरी, ओम बधाणी, डॉ. प्रीतम, धीशराज शाह, डॉ. शैलेंद्र मैठाणी, यतेंद्र गौड़, मोहन वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।