ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
शिक्षा विभाग के डीबीटी योजना के तहत बैंकों को भेजी गई रकम में सर्विस चार्ज काटने का मामला सामने आया है। विभागीय अधिकारी जानकारी जुटा रहे है कि किस बैंक ने कितना सर्विस चार्ज काटा है। इसके बाद कार्रवाई की बात कही जा रही है।
प्रतिवर्ष शिक्षा विभाग की ओर से छात्र-छात्राओं को निशुल्क किताबें दी जाती थीं, लेकिन इस वर्ष शिक्षा विभाग ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना (डीबीटी) लागू की। इसके तहत निशुल्क किताबें न देकर खातों में पैसा भेजा जाना था, जिसमें प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को 150 और जूनियर स्कूल में 250 रुपये प्रति बच्चा दिया गया था। हालांकि, बाद में विभाग ने इसमें कुछ बढ़ोतरी भी की थी, जो 250 और 350 रुपये प्रति बच्चा किया गया। विभागीय अधिकारियों ने स्कूलों को निर्देशित किया था कि सभी छात्र-छात्राओं का खाता बैंक में खुलवाया जाए, लेकिन इसमें कई दिक्कतें आ रही थी।
कई कोशिश के बाद भी आज तक सभी छात्र-छात्राओं के खाते नहीं खुल सके हैं। वहीं, एक स्कूल के प्रधानाध्यापक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल को किताबों के पैसों केे सापेक्ष जो चेक मिला था, उसे विद्यालय के खाते में लगाया गया, जिससे बैंक ने 354 रुपये सर्विस चार्ज काटा है। इसके अलावा भी कई अन्य विद्यालयों में यह दिक्कत आ रही है। बताया जाता है कि मामला विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में है। देखने वाली बात यह होगी कि अब मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।
कोट-
कुछ बैंकों द्वारा सर्विस चार्ज काटने की बात सामने आई है। इस बाबत जानकारी जुटाई जा रही है।
-ब्रह्मपाल सिंह सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी, बेसिक