रुड़की/पिरान कलियर। नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ईद उल अजहा का त्योहार पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। नगर की प्रमुख ईदगाह में बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने ईद उल अजहा की नमाज अदा की। मुफ्ती मोहम्मद सलीम ने ईनमाज अदा कराई। नमाज के बाद देश व प्रदेश की खुशहाली, अमन, शांति और खुशहाली की दुआ के साथ- साथ कौम की तरक्की और केरल बाढ़ पीड़ितों के लिए दुआ की गई।
नमाज अदा करने से पहले अपने खुतबे में मुफ्ती मोहम्मद सलीम ने कहा कि ईद उल अजहा का त्योहार त्याग और बलिदान की प्रेरणा देता है। यह त्योहार अमन व शांति का संदेश भी देता है। उन्होंने अपने खुतबा में कहा कि चार हजार साल पहले पैगंबर हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी अल्लाह की राह में दी थी, जिसकी याद में ईद-उल-अजहा यह त्योहार मनाया जाता है।
जामा मस्जिद में ईद उल अजहा की नमाज मौलाना अरशद कासमी ने अदा कराई। मदरसा व ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष डा. इरशाद मसूद ने पर्व की बधाई दी। प्रमुख सामाजिक संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तराखंड शाखा की ओर से केरल में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों के सहायतार्थ चंदा एकत्रित किया गया। इसके अलावा शेख बेंचा मस्जिद में मौलाना मोहम्मद यूसुफ, मरकज वाली मस्जिद में कारी अब्दुल बासित, मदीना मस्जिद में मौलाना इस्तखार अली, मदरसा इरफान उल उलूम में मौलाना नसीम कासमी तथा रामपुर ईदगाह में मौलाना मोहम्मद मुस्तकीम ने नमाज अदा कराई। नमाज के बाद मुस्लिम समाज ने कुर्बानी की रस्म अदा की। वहीं पिरान कलियर सहित आसपास के इलाकों में भी ईद उल अजहा का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दरगाह साबिर की साबरी जामा मस्जिद के सदर इमाम हाफिज सऊद साबरी, नई बस्ती स्थित मरकज वाली मस्जिद में मौलवी जाकिर ने नमाजियों को नमाज अदा कराई। वहीं दूसरी ओर कलियर नगर पंचायत के महमूदपुर, मुकर्रबपुर, कलियर की मस्जिदों सहित रहमतपुर, बाजूहेड़ी, सोहलपुर, मानुबास और आसपास के देहात क्षेत्र और कस्बों ईद का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया। वहीं मंगलौर और क्षेत्र के आसपास के इलाकों में त्योहार हर्षोल्लास के साथ और परंपरागत तरीके से मनाया गया। सुबह ईदगाह में नमाजियों ने नमाज अदा की। इसके बाद एक- दूसरे के गले लगकर ईद की मुबारकबाद दी। साथ ही कुर्बानी की रस्म अदा की। इस दौरान उलेमाओं ने ईद उल अजहा को शांति से मनाने की अपील की। कहा कि कुर्बानी के वक्त कहीं पर भी गंदगी न फैलाएं। कुर्बानी के मीट को ढककर लाएं। कोई ऐसा काम न करें कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे।