ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) में लंबित पड़ी परियोजनाओं में लेटलतीफी पर ऊर्जा सचिव की फटकार के बाद उन आठ परियोजनाओं को चिह्नित किया गया है, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर मार्च 2019 तक पूरा किया जाना है। इनमें हर्रावाला में प्रस्तावित 220 केवी का उत्तराखंड का पहला जियोलॉजिकल इन्फार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित पावर स्टेशन ज्यादा अहमियत वाला है। शुक्रवार को प्रबंध निदेशक ने विभागीय अफसरों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने परियोजनाओं की लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए उन्हें हर हाल में समय से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
पिटकुल की दो दर्जन से अधिक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को बहुत पहले ही पूरा किया जाना था, लेकिन बजट जारी होने के बावजूद इनमें से कई अधूरी पड़ी हैं तो कई परियोजनाओं पर काम ही शुरू नहीं हो पाया है। ऊर्जा सचिव राधिक झा ने हाल ही में लेटलतीफी पर पिटकुल अधिकारियों को फटकार लगाई तो वे हरकत में आए हैं। पिटकुल के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल ने बताया कि ऊर्जा सचिव के निर्देश पर प्रदेश में प्राथमिकता वाली आठ परियोजनाओं को चिह्नित कर लिया गया है।
इनमें हर्रावाला स्थित 220 केवी का जीआईएस आधारित पावर सब स्टेशन, हरिद्वार में पिरान कलियर, पदारथा, बागेश्वर स्थित पावर सब स्टेशन, 132 केवी की बिंदाल-पुरकुल हाईटेंशन लाइन, 220 केवी की ब्रह्मवारी-श्रीनगर लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं को किसी भी सूरत में मार्च 2019 तक पूरा किया जाना है। प्रबंध निदेशक सिंघल का कहना है कि हर 15 दिन में निर्माणाधीन परियोजनाओं की समीक्षा की जाएगी। किसी भी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।