ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
हमें अगले चुनाव नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के बारे में सोचना होगा। जो लोग राजनीति करते हैं, वे नीति नहीं जानते और जो नीति जानते हैं, वे राजनीति नहीं करते। देहरादून के हैस्को (हिमालयन पर्यावरण अध्ययन आर्गनाइजेशन) गांव पहुंचे भाजपा सांसद वरुण गांधी कुछ इसी अंदाज में लोगों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि नीति नियंता केवल राजनीति में लगे रहते हैं। इस दौरान उन्होंने हैस्को गांव शुक्लापुर में विभिन्न तकनीकों का अवलोकन भी किया।
शुक्रवार को शुक्लापुर गांव पहुंचने पर सांसद वरुण गांधी का हैस्को के संस्थापक पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी, स्थानीय लोगों, चकराता क्षेत्र से आए ग्रामीणों, चमोली जनपद से आई महिलाओं, युवाओं ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उनके एक दिवसीय भ्रमण का मकसद ग्रामीण आर्थिकी एवं पर्यावरण के मुद्दों पर चर्चा करना था। इस दौरान हुई परिचर्चा में डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि आज राजनीति को भी दिशा की जरूरत है। ऐसे लोग आगे आएं जो सामाजिक समानता को महत्व दें। डॉ. जोशी ने बताया कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सकल घरेलू उत्पाद के सामानांतर सकल पर्यावरण उत्पाद भी बेहद आवश्यक है। राज्य सरकार तो इसकी पहल कर चुकी है पर केंद्र सरकार को भी इस पर गंभीर होने की आवश्यकता है। सांसद वरुण गांधी ने हैस्को के कार्यों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि जिनको नीति बनानी चाहिए वे इससे कोसों दूर रहते हैं। जो नीतियां बनाते हैं, वे राजनीति जानते हैं, नीति नहीं। लिहाजा अब समय आ गया है कि देश में राजनीति को जंग की तरह नहीं, बल्कि नीतिगत स्पर्धा की तरह लें। हमें जल-जंगल-जमीन के बारे में भी जागरूक होना होगा। अगर हम सबकी मानसिक शक्तियां एकजुट होंगी तभी इस देश का उत्थान होगा। गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य होने चाहिए। जब नीतियों का विकेंद्रीकरण होगा, तभी देश आगे बढे़गा। हैस्को परिसर में पौधा रोपते हुए वरुण गांधी ने कहा कि रिश्तों की शुरुआत पौधरोपण से होनी चाहिए। क्योंकि बढ़ते समय के साथ ये रिश्तों को घनिष्ठ बनाते हैं। इस मौके पर डॉल्फिन इंस्टीट्यूट के चेयरमैन अरविंद गुप्ता, डॉ. सैस विश्वास, डॉ. राकेश कुमार, डॉ. रुचि बडोला, डॉ. संध्या जोशी, डॉ. किरण नेगी, डॉ. सुभाष नौटियाल, डॉ. हिमानी पुरोहित, विनोद खाती आदि मौजूद रहे।