ऊखीमठ। तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के प्राचीन मंदिर के सभा मंडप की दीवार के पत्थर अपनी जगह छोड़ रहे हैं, जिससे मंदिर को खतरा पैदा हो रहा है। हक-हकूकधारियों और मंदिर प्रबंधन समिति ने शासन-प्रशासन से मंदिर की दीवारों की मरम्मत कराने की मांग की है।
तुंगनाथ घाटी में पिछले वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं से तुंगनाथ मंदिर भी प्रभावित हुआ है। मंदिर की दीवारें चारों तरफ से जर्जर हो रही हैं। सभा मंडप की दीवार के ऊपरी कोने के पत्थर बाहर की ओर खिसक गए हैं, जिससे काफी स्थान खाली हो गया है। हक-हकूकधारियों द्वारा खाली स्थान को भरने के लिए छोटे-छोटे पत्थर भरे गए हैं, लेकिन ये सुरक्षा के लिए नाकाफी हैं। धाम में मौजूद अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी जीर्णशीर्ण हो रहे हैं, पर कोई सुध नहीं ले रहा है।
मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित का कहना है कि मंदिर की सुरक्षा और देखरेख को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन को अवगत कराया जा रहा है, पर सुनवाई नहीं हो रही है। मठापति राम प्रसाद मैठाणी, सुबोध मैठाणी ने बताया कि जल्द मंदिर संरक्षण को लेकर ठोस प्रयास नहीं किए गए तो, मंदिर की दीवारों के कटवा पत्थर कभी भी भरभरा कर ढह सकते हैं। उन्होंने केदारनाथ की तर्ज पर तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर की दीवारों की भारतीय पुरातत्व विभाग की देखरेख में मरम्मत की मांग की है। इधर, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने बताया कि मंदिर के संरक्षण के लिए योजना तैयार की जा रही है। साथ ही विशेषज्ञों से मंदिर के सर्वेक्षण के लिए भी एएसआई को पत्र लिखा गया है