ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
अंतरात्मा की खोज शिक्षा की सही परिभाषा है। हर व्यक्ति के अंदर अंत:करण की ध्वनि होती है। अगर इंसान उस आवाज को सुन ले तो वह खुद प्रशिक्षित होने लगता है। ये बातें फिक्की लेडिज आर्गनाइजेशन की ओर से राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित गोष्ठी में यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली के पूर्व वाइस चांसलर पद्मश्री प्रो. दिनेश सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि फिक्की फ्लो के माध्यम से एक ऐसी महिलाएं निकलकर सामने आएं जो पूरे देश को प्रकाशित कर नाम रोशन करें।
संस्था की अध्यक्ष शिल्की अरोड़ा ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर खुले हैं, लेकिन इस क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने की जरूरत है। सामाजिक और आर्थिक मुद्दों, समानता एवं शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण अधिकार महिलाओं के लिए चुनौती हैं। इसीलिए सेव द गर्ल चाइल्ड : मुझे जीने दो की थीम के तहत लड़कियों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वेल्हम ब्वॉयज स्कूल की की प्रिंसिपल गुनमीत बिंद्र ने कहा कि यदि महिलाओं के पास खुद की शक्ति है तो उन्हें सशक्त करने की आवश्यकता नहीं है। मौके पर संस्था की सीनियर वाइस चेयरपर्सन नाजिया यूसुफ इजुद्दीन, वाइस चेयरपर्सन किरन भट्ट टोडरिया, सचिव पूजा अग्रवाल, संयुक्त सचिव कोमल बत्रा, अनुपमा खन्ना, सारिका पंछी आदि मौजूद रहीं।