ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
हमें क्या मालूम था कि इश्क क्या होता है
एक तुम मिले और जिंदगी मोहब्बत बन गई
देहरादून (ब्यूरो)। अनुराग और रोहिनी के लिए पहली नजर, वो पीछा करते-करते शुरू हुआ मोहब्बत का सफर, आज आठ साल बाद भी हर वेलेंटाइन पर नई यादें और जज्बात लेकर आता है। प्यार की यह कहानी आज युवाओं के लिए एक मिसाल है। जातपात से ऊपर उठकर अनुराग और रोहिनी आज भी हर वेलेंटाइन डे पर आठ साल पुराने अंदाज में एक दूसरे को प्यार का इजहार करते हैं।
बात उन दिनों की है जब रोहिनी रोजाना अनुराग की हनुमान चौक स्थित दुकान के सामने से गुजरती थी। प्राइवेट जॉब करने वाली रोहिनी कब अनुराग के लिए रोजाना का इंतजार बन गई, पता ही नहीं चला। इसके बाद अनुराग हर दिन रोहिनी का पीछा करने लगा। पीछा करते-करते रोहिनी के ऑफिस तक जाने लगा। धीरे-धीरे दोनों के बीच दोस्ती हुई। यही दोस्ती कब प्यार में बदल गई, दोनों को पता ही नहीं चला। जिसके बाद दोनों छुपछुप कर मिलने लगे। प्यार का सिलसिला चल निकला। अनुराग अपने पुराने स्कूटर पर बैठाकर रोहिनी को पलटन बाजार की गलियों में घुमाने लगा। वेलेंटाइन डे की चर्चा हुई तो रोहिनी ने चहककर बताया कि हमारी जिंदगी का सबसे खूबसूरत लम्हा 26 जून 2008 का था, जब घरवालों से चोरी-छिपे ऋषिकेश और हरिद्वार गए। हम दोनों ने पूजा कराई। पूरा दिन कब बीत गया, पता ही नहीं चला। इसके बाद पहला वेलेंटाइन डे भी हमारे लिए खास बना था। दिल में घबराहट जरूर थी लेकिन मोहब्बत के जज्बे के सामने सब कुछ फीका था। इश्क और मुश्क छिपाये नहीं छिपते, यह इश्क भी कब तक छिपता। रोहिनी के परिजनों को इसका पता चल गया। परिजनों ने जाति अलग-अलग होने की वजह से इस रिश्ते को नकार दिया। रोहिनी डरे हुए अंदाज मेें बताती है कि मिलना-जुलना बंद हो गया। एक पल को लगा कि मोहब्बत की यह कहानी यहीं खत्म न हो जाए लेकिन अनुराग का प्यार, विश्वास और ईश्वर की कृपा साथ थी। आखिरकार प्यार की यह कहानी परवान चढ़ी और 20 जनवरी 2010 को शादी हो ही गई। आज जब वेलेंटाइन डे आता है, अनुराग और रोहिनी का प्यार फिर ताजा हो जाता है। दो बच्चों के बीच प्यार आज भी उतना ही संजीदा है। उतना ही गहरा है।