उत्तरकाशी। स्याबा गांव के किसान इस बार भी परेशान है, लेकिन इनकी परेशानी का कारण मौसम की बेरुखी नहीं बल्कि चार साल बाद भी गांव को सड़क से जोड़ने के लिए पुल का न बन पाना है। बिना पुल के ग्रामीण नकदी फसलें बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इसलिए अब ग्रामीणों ने नकदी फसलों को बोना भी कम कर दिया है।
भटवाड़ी ब्लॉक के स्याबा गांव की ककड़ी कभी अलग पहचान रखती थी। ककड़ी बेचकर गांव का हर परिवार साल में करीब 35 हजार की कमाई करता था। जून 2013 में भागीरथी की बाढ़ में नलुण में बना झूला पुल क्या बहा ग्रामीणों की आय के साधन भी इसके साथ बह गए। सरकार ने बहे पुल की जगह 120 मीटर लंबा तार बांधकर हाथ से खींचने वाली ट्रॉली लगाकर इतिश्री कर ली। महज सवा क्विंटल भार वहन क्षमता वाली इस ट्रॉली से ग्रामीणों की आवाजाही ही खासी जोखिम भरी है। अतिरिक्त आय का जरिया खत्म होने से गांव में सेलुकू के त्योहार की रंगत भी फीकी पड़ गई है। गांव के सुरेंद्र सिंह, देवेंद्र, रतन सिंह आदि ने बताया कि ट्राली से नकदी फसलें बाजार पहुंचाने की स्थिति न बन पाने से ग्रामीणों ने ककड़ी, बीन, चौलाई, आलू, मटर आदि उगाना ही बंद कर दिया है। स्याबा गांव के बच्चे मनेरी एवं सौरा इंटर कॉलेज में पढ़ने जाते है। बगैर पुल के समय पर स्कूल न पहुंच पाने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
कोट..
नलूणा में 110 मीटर स्पान के गार्डर ब्रिज पर दोनों एबेटमेंट का कार्य पूरा हो गया है। फेबरीकेशन कार्य प्रगति पर है। दिसंबर के अंत तक गार्डर ब्रीज कार्य पूरा किया जाएगा।
-रमेश चंद्र, अधिशासी अभियंता, लोनिवि वर्ल्ड बैंक उत्तरकाशी।