ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
कलियुग में श्रीमद्भगवद् गीता कल्याण का मार्ग बनाती है। ऋ षियों, ज्ञानियों के कंठ में सरस्वती विराजमान होती हैं। साधु, विद्वान महापुरुष कभी संस्कृति का अनादर नहीं करते हैं। न ही कभी गलत शब्दों का प्रयोग करते हैं।
यह प्रवचन हर्रावाला सिद्ध पुरम कॉलोनी में आयोजित श्रीमद्भगवद् के सातवें दिन कथा वाचक पंडित प्रमोद चमोली ने दिए। उन्होंने कहा कि कलियुग में प्रवेश करते ही राजा परीक्षित की बुद्धि का हरण हुआ और उन्हाेंने अज्ञानतावश तपस्या में लीन ऋषि के गले में सर्प डाल दिया। इस पाप से मुक्ति पाने को राजा परीक्षित ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। इसके बाद उनका कल्याण हुआ। इस दौरान पंडित प्रमोद चमोली ने शुक्राचार्य से अर्जुन को धनु विद्या सिखाने की कथा सुनाई। नौ मई को कथा का विधि-विधान से समापन होगा। आयोजन में आचार्य अर्जुन भट्ट, शांति प्रसाद चमोली, सुनील जगूड़ी, हेमा पुरोहित, संजय सिंह चौहान, दिनेश सिंह, राजेंद्र सिंह गैरोला, सहदेव यादव, विमल जुगरान, गणेश बहादुर ने सहयोग किया।