देहरादून। मसूरी में सभासद पति के कब्जे वाली भूमि की गायब पत्रावलियां अब जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय से मिल गई हैं। यह भूमि वर्ष 1918 में मीट और सब्जी बाजार के लिए अधिग्रहीत की गई थी। इससे अब सभासद पति के खिलाफ चल रहे कब्जे के मुकदमे में पालिका मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। जबकि, इस भूमि को सिर्फ मौखिक रूप से पालिका अपना बताती चली आ रही थी। अब सभासद का निर्वाचन रद्द होने का खतरा बना हुआ है।
गौरतलब है कि मसूरी नगर पालिका की सभासद गीता कुमई के पति भरत सिंह कुमई पर पालिका की भूमि कब्जाने का आरोप है। उनके खिलाफ वर्ष 2009 से मुकदमा भी चल रहा है। इसी बीच बीते साल जब पालिका के चुनाव शुरू हुए तो गीता कुमई ने नामांकन में इस बात की जानकारी तो दी लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि भरत सिंह कुमई उनके पति हैं। जबकि, परिवार के किसी भी सदस्य पर पालिका या निगम की भूमि पर कब्जा संबंधी मुकदमा चला हुआ होता है तो उसकी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।
ऐसे में इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने सारे मामले की जांच कर शासन को 60 दिन के भीतर गीता कुमई के निर्वाचन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार कुमई परिवार आश्वस्त था कि पालिका ने अब तक अपने दावे के पक्ष में कोई लिखित साक्ष्य जमा नहीं किया। इसका कारण है कि कैमिलबैक स्थित इस भूमि की पत्रावलियां ही पालिका कार्यालय से गायब थीं। इसी बीच इस सप्ताह पालिका परिषद की ओर से इस भूमि के संबंध में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से जानकारी मांगी थी। इसमें पता चला कि यह जमीन डिप्टी कलेक्टर मसूरी ने वर्ष 1918 में मीट और सब्जी मार्केट के लिए अधिग्रहीत की थी। अब पालिका मजबूती से अपना पक्ष रखेगी।
इस भूमि संबंधी दस्तावेजों की प्रतियां जिला कलेक्ट्रेट से मिल चुकी हैं। अब पालिका अपना पक्ष मजबूती से अदालत में रखेगी। प्रयास के बाद इन दस्तावेजों की प्रतियां हासिल हुई हैं।
- अनुज गुप्ता, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद मसूरी