ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के प्रशासनिक एवं लोक शिकायत विभाग की ओर से नेशनल अवॉर्ड फॉर ई-गवर्नेंस के तहत मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) को गोल्ड मेडल दिया गया है। एमडीडीए उपाध्यक्ष यह पुरस्कार 27 फरवरी को दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इटरनेशनल सेंटर, जनपथ में आयोजित कार्यक्रम में ग्रहण करेंगे।
एमडीडीए उपाध्यक्ष डॉ. आशाीष कुमार श्रीवास्ताव ने बताया कि इस पुरस्कार के लिए केंद्र सरकार आवेदनों को कई चरणों तथा विशेषज्ञों से मूल्यांकन कराता है। इसके बाद केंद्र के अपर सचिव की अध्यक्षता में 10 विशेषज्ञों की समिति के सामने चयनित आवेदकों द्वारा प्रस्तुतिकरण देता है। इसके बाद सवाल-जवाब पूछने के बाद चयन होता है। एमडीडीए को इसी प्रक्रिया से गुजरने के बाद इस कैटेगिरी में गोल्ड मेडल के लिए चुना गया। उन्होंने इसका श्रेय एमडीडीए की सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया।
आर. मीनाक्षी सुंदरम के कार्यकाल में शुरू हुई थी व्यवस्था
एमडीडीए को जिस ईआरपी प्रोजेक्ट के लिए गोल्ड मेडल मिला है। वह तत्कालीन एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम के कार्यकाल में शुरू किया गया था। उस समय एमडीडीए में फाइलें नहीं मिलने की काफी शिकायतें आ रही थीं। आवेदक जहां फाइल जमा करने की बात कहता था। वहीं स्टॉफ फाइल नहीं मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता था। ऐसे में जवाबदेही तय करने के लिए तत्कालीन उपाध्यक्ष ने 2014 में नया बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम लागू किया। इसके तहत किस अधिकारी और कर्मचारी के पास कितने दिन फाइल रहेगी, इसका निर्धारण किया गया था। सभी पत्रावलियों पर कलर कोडिंग की गई थी, जिससे स्टाफ के साथ ही आवेदक को भी उसकी ऑनलाइन जानकारी मिलती है। इस व्यवस्था से एमडीडीए की कार्य व्यवस्था में काफी सुधार आया है।
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इन कार्यों के चलते मिला गोल्ड मेडल
-नया बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम बिना टच प्वाइंट केकॉन्सेप्ट के साथ लागू किया गया सिस्टम है। इसमें भवन उपनियमों की जांच अब स्वचालित प्रणाली द्वारा की जाती है। इसके जरिये पत्रावली निस्तारण तथा कर्मचारियों की जवाबदेही तय करते हुए समयसीमा तय की गई है। सभी पत्रावलियों पर कलर कोडिंग की गई है। इससे पत्रावलियों के निस्तारण में सुधार आया है।
-प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने से निर्माण कार्य की प्रगति की भी निगरानी की जाती है। इससे परियोजना की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिली। हर प्रोजेक्ट का भुगतान को भी वित्त मॉड्यूल के साथ एकीकृत किया गया।
-प्राधिकरण को अपने कार्यप्रणाली में गुणात्मक सुधार हेतु आईएसओ 9001: 2015, आईएसओ 14001: 2015 तथा ओएचएसएएस 18001: 2007 आदि सर्टिफिकेट भी मिले हुए हैं।
-प्राधिकरण द्वारा बिल्डिंग बॉयलाज, प्लानिंग तथा लोक शिकायत निस्तारण के कार्यों में नवीनता लाने के लिए एमडीडीए अर्बन गवर्नेंस फेलोशिप शुरू की गई है।
-सभी प्रकार के भुगतान ऑनलाइन पेमेंट गेटवे, मोबाइल एप और पीओएस मशीनों के जरिये करने की सुविधा शुरू की गई है।
-पहले विभिन्न आवेदनों की स्थिति की जानकारी नहीं हो पाती थी। अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और हेल्प डेस्क के जरिये तुरंत पता चल जाती है।
-ई-फाइल मूवमेंट सिस्टम ने फाइल मूवमेंट के समय को कम करने से पत्रावलियों को जल्द निपटाने में मदद मिली।
-सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली (पीजीआरसी सिस्टम) से जनता की शिकायत का पता लगाने में मदद मिली।
-पारदर्शी और लागत प्रभावी खरीद के लिए ई-टेंडरिंग एवं जैम पोर्टल का उपयोग किया गया।
-जनसपंर्क तथा सूचना उपलब्ध कराने के लिए वेब पोर्टल, ई-मेल, एसएमएस, टेलीफोन तथा सोशल मीडिया का प्रयोग किया गया। साथ ही पेमेंट गेटवे, मोबाइल एप तथा डिजिटल सिग्नेचर का प्रयोग किया गया।