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साहित्य केवल शब्दों तक ही सीमित नहीं : सीएम

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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समय, साक्ष्य व अर्श सामाजिक संस्था की ओर से शुक्रवार को राजपुर स्थित क्रिश्चियन रिट्रीट सेंटर में आयोजित दून लिटरेचर फेस्टिवल में देशभर के साहित्यकार जुटे। फेस्टिवल के पहले दिन साहित्यकारों ने देश से जुडे़ विभिन्न मुद्दों पर विचार रखे। दो दिवसीय फेस्टिवल का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। फेस्टिवल के पहले दिन स्मारिका का लोकार्पण किया गया।
इस मौके पर सीएम रावत ने कहा कि संस्था समाज और साहित्यकारों को जोड़ने के लिए सेतु की तरह काम कर रही है। फेस्टिवल के पहले दिन देशभर से जुटे युवाओं की ललक साहित्य के प्रति रुचि दर्शाती है। साहित्य केवल शब्दों तक ही सीमित नहीं होता, इसका दायरा विशाल होता है। साथ ही उन्होंने संस्था की ओर से अगले साल होने वाले फेस्टिवल के पोस्टर का लोकार्पण भी किया।
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इसके बाद साहित्यकारों ने समकालीन हिंदी कविता और महिलाएं, उत्तराखंड हिमालय का गाथा साहित्य, भारत में लोकतंत्र, सफलता और चिंताएं विषय पर विस्तार से विचार रखे। सत्र के समापन पर अनुराग वर्मा के निर्देशन में पंचम वेद क्रियेशन्स चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से कलिंग विजय नामक नाटक का मंचन किया गया। फेस्टिवल के पहले दिन संस्था की ओर से आयोजित बाल लेखन प्रतियोगिता में लगभग 200 बच्चों ने अपनी लेखन प्रतिभा दिखाई। जिसमें बच्चों ने अपने द्वारा रचित कविता, कहानियों को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर एस. फारुख, अचलानंद जखमोला, कमला भसीन, रश्मि भारद्वाज, पंखुड़ी सिन्हा, राखी उपाध्याय, प्रयाग जोशी, नरेंद्र सिंह नेगी, देब सिंह पोखरिया, गणेश खुगशाल, कमला पंत आदि मौजूद रहे।
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