ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य में पिरूल (चीड़ की पत्ती) से बिजली बनाने की नीति को लागू कराने को लेकर ऊर्जा सचिव राधिका झा ने शुक्रवार को राज्य के 11 पर्वतीय जिलों के जिलाधिकारियों, प्रभागीय वनाधिकारियोें और जिला उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधक से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जानकारी ली।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने सभी जिला अधिकारियों को बताया कि राज्य के 11 पर्वतीय इलाकों में पलायन को रोकने के लिए पिरूल से बिजली उत्पादन करने की नीति बनायी गई है। मुख्यमंत्री ने इस योजना को राज्य के सभी पर्वतीय जिलों में तेजी से लागू कराने के निर्देश दिए हैं। ऊर्जा सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्यशालाओं के माध्यम से लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जाए। इसमें ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
इस दौरान पौड़ी गढ़वाल, टिहरी, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़ और चमोली के जिलाधिकारियों ने अवगत कराया कि उनके जिले में जिला स्तरीय नियोजन समितियों का गठन कर लिया गया है। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी ने बताया कि पिरूल से बिजली बनाने के लिए जिले में दो प्लांट काम कर रहे हैं। अब तक 729 यूनिट बिजली का उत्पादन भी किया जा चुका है। पांच प्लांट स्थापित किए जाने हैं। इसके अलावा सचिव ऊर्जा ने प्रभागीय वनाधिकारियों से पिरूल के एकत्रीकरण के बारे में भी विस्तार से जानकारी ली। सचिव ऊर्जा ने कहा कि सरकारी भवनों में सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा चयनित रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनियों के माध्यम से सौर ऊर्जा खरीदने जाने के लिए योजनाएं बनायी गई है। इस योजना को तेजी से लागू कराया जाए। सचिव ने केंद्र सरकार की ओर से संचालित उजाला कार्यक्रम के तहत एलईडी बल्ब का वितरण महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कराए जाने पर भी जोर दिया।