बिना संबद्धता ही आयुर्वेद विवि ने बांट दीं सीटें
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने निजी कॉलेजों को सत्र 2018-19 की संबद्धता दिए बिना ही बीएएमएस, बीएचएमएस की सीटें आवंटित कर दी हैं। इससे विवि की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि विवि प्रशासन का कहना है कि कॉलेजों को सीटों का आवंटन अस्थायी संबद्धता के आधार पर किया गया है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) रेगुलेशन 2009 और उत्तराखंड आयुर्वेद विवि परिनियमावली 2015 के अनुसार व्यावसायिक संस्थाओं को वर्ष दर वर्ष विवि से संबद्धता प्राप्त करना आवश्यक होता है। जो की देश के सभी विवि से संबद्ध संस्थाओं के साथ-साथ उत्तराखंड में भी 2014-15 से ही लागू है। इसके लिए परिनियमावली 2015 में इसका स्पष्ट प्रावधान भी बनाया गया है। इसके तहत संस्थाओं को हर साल एक लाख का बैंक ड्राफ्ट संलग्न कर संबद्धता का प्रस्ताव विवि को प्रेषित करना होता है। इसके बाद विवि के कुलपति द्वारा तीन सदस्यीय निरीक्षण मंडल गठित किया जाता है। जो की संस्थाओं में जाकर सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसन (सीसीआईएम) और सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी (सीसीएच) दिल्ली द्वारा निर्धारित उपलब्ध मानकों की जांच करता है। इसके बाद ही विवि की ओर से संबद्धता दी जाती है। संबद्धता के बाद ही विवि नियमानुसार काउंसिलिंग से उस कॉलेज में सीटें आवंटित कर सकता है, लेकिन इस साल कुछ कॉलेजों को संबद्धता दिए बिना सीधे सीटें अलॉट कर दी गईं। सवाल उठ रहे हैं कि विवि ने खुलेतौर पर नियमों का उल्लंघन किया है।
बीते सत्र में भी हुई थी नियमों की अनदेखी
गत सत्र में भी विवि ने नियमों का दरकिनार कर बिना संबद्धता दिए ही सीटें आवंटित कर दी थीं। जब मामला मीडिया के माध्यम से उछला था तो विवि ने आननफानन संदबद्धता की प्रक्रिया पूरी की थी। बताया जा रहा है कि इसके बाद से आज तक पुराने सत्र का संबद्धता से संबंधित पत्र जारी नहीं किया जा सका है।
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कॉलेजों को सीसीआईएम ने टेंपरेरी (अस्थाई) मान्यता दी है। इसी मान्यता के आधार पर हमने भी संबद्धता दी है। सभी कॉलेजों को 31 दिसंबर तक मानक पूरे करने का समय दिया गया है। काउंसिलिंग नियमानुसार ही हुई है।
-डॉ. राजेश अदाना, प्रभारी कुलसचिव, आयुर्वेद विवि