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अब पिरूल से बनाई जाएगी बिजली

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अब पिरूल से बनाई जाएगी बिजली
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य मेें पिरूल (चीड़ की पत्ती) से बिजली बनाने को लेकर रास्ता साफ हो गया है। पिरूल से बिजली बनाने को लेकर शासन ने नई नीति जारी कर दी है। निजी कंपनियों की मदद से पिरूल से बिजली बनाई जाएगी। यदि योजना सफल होती है तो राज्य में पिरूल से हर साल 150 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि पिरूल से बिजली बनाने को लेकर नीति जारी कर दी गई है। बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों का चयन उरेडा द्वारा किया जाएगा। जबकि वन क्षेत्रों से पिरूल निकालने का ठेका देने की जिम्मेदारी वन विभाग की होगी। कंपनी द्वारा पिरूल से बिजली बनाने के बाद उत्पादित बिजली की दरें विद्युत नियामक आयोग तय करेगा। उन्होंने बताया कि यदि पिरूल का पूरी तरह से दोहन किया जाए तो राज्य में कई जगहों पर विद्युत उत्पादन इकाइयां स्थापित कर 250 मेगावाट तक बिजली बनाने के साथ ही 2000 मीट्रिक टन की ब्रिकेटिंग बायो ऑयल स्थापित करने से बिजली की स्थानीय जरूरत को पूरा किया जा सकेगा। साथ ही उत्पादन इकाइयां स्थापित होने से रोजगार के अवसर भी सृजित हो सकेंगे। पिरूल निकालने की जिम्मेदारी वन पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों को सौंपी जाएगी।
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ऊर्जा सचिव ने बताया कि फिलहाल जो योजना तैयार की गई है उसके तहत सन 2019 में एक मेगावाट की बिजली परियोजनाओं की स्थापना, सन 2021 में पांच मेगावाट व सन 2030 तक 100 मेगावाट की परियोजनाओं की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
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इसके अलावा सन 2030 तक प्रतिवर्ष 2000 मीट्रिक टन क्षमता के 50 बायोमास आधारित ब्रिकेटिंग संयंत्र लगाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में जितना वन क्षेत्रफल है, उसमें से 16.36 फीसदी वन क्षेत्र में चीड़ के पेड़ हैं, जिनसे छह लाख टन पिरूल निकलता है। यदि इतनी अधिक मात्रा में पिरूल का उपयोग किया जाता है तो बिजली उत्पादन के साथ ही रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
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