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तीन माह में भी पूरा नहीं हो पाया सत्यापन

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तीन माह में भी पूरा नहीं हो पाया सत्यापन
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। तीन माह से चल रही कवायद में तमाम दावों के बावजूद अभी तक पेंशनरों का ही भौतिक सत्यापन हो पाया है। अभी तक केवल 50 फीसदी पेंशनरों का ही सत्यापन हो सका है।
उल्लेखनीय है कि जिले में 79800 हजार विधवा, वृद्ध और दिव्यांग पेंशनर हैं। सरकार की ओर से समाज कल्याण की मार्फत एक हजार की पेंशन दी जाती है। यह पेंशन लेने के लिए नए आवेदक और पहले से पात्र पेंशनर का सत्यापन किया जाता है। इसके बाद ही तीन अथवा छह माह में पेंशन संबंधित खाते में जारी की जाती है।
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इसके लिए मई में सत्यापन शुरू हुआ था। पहले इसकी आखिरी तारीख 30 जून थी लेकिन यह समय पूरा होने तक आधे पेंशनरों का भी सत्यापन नहीं हो पाया था। सत्यापन कराने के लिए पेंशनरों को तमाम फजीहतें झेलनी पड़ रही थी। इसके बाद विभागीय अधिकारी की मांग पर शासन ने सत्यापन की तिथि 31 जुलाई कर दी थी। कार्य पूरा न होते देख विभाग ने अब यह तिथि 15 अगस्त कर दी गई है।
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बावजूद इसके अभी तक पेंशनरों का सत्यापन पूरा नहीं हो पाया है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभी तक लगभग 50 फीसदी की पेंशनरों का सत्यापन हो पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चार दिनों में 50 प्रतिशत का सत्यापन कैसे होगा? जिन पेंशनरों का सत्यापन नहीं हुआ, उन्हें आशंका है कि कहीं पिछले सालों की भांति सत्यापन की खानापूर्ति कर सभी को अपात्र न दिखा दिया जाए। जबकि पिछले दिनों सत्यापन के लिए तहसील पहुंच रहे पेंशनरों को अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि घर-घर जाकर सभी का सत्यापन किया जाएगा। इस पर समाज कल्याण अधिकारी ने इस कार्य में लगे बीएलओ को फटकार लगाते हुए निर्धारित समय में हर हाल में सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं।

जिले में ये है पेंशनरों के आंकड़े
वृद्धावस्था पेंशन - 52000
विधवा-18000
दिव्यांग पेंशन - 9000
किसान पेंशन - 800

कोट :
कार्य में लगे बीएलओ को निर्देश दिए गए हैं कि सत्यापन कर 15 अगस्त तक सूचित करें। उम्मीद है कि अंतिम तिथि तक सत्यापन पूरा हो जाएगा।
- अनुराग शंखधर, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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