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27 जुलाई को होगा इस शताब्दी का सबसे लम्बा चंद्र ग्रहण

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हरिद्वार। ग्रहण जब भी पड़े हैं तभी जनमानस उनसे प्रभावित हुआ है। वैज्ञानिकों के साथ ज्योतिष के क्षेत्र में भी ग्रहण का भारी महत्व है। 27 जुलाई की रात गुरु पूर्णिमा के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ेगा। यह ग्रहण करीब तीन घंटे लंबा होने वाला है। ग्रहण का सूतक 27 की सवेरे ही लग जाएगा।
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चंद्र ग्रहण एक मात्र ऐसा ग्रहण है जो इस वर्ष भारत में दिखाई देगा। यद्यपि वर्तमान संवत्सर में चार ग्रहण और पड़ रहे हैं, लेकिन यही ग्रहण भारत में नजर आएगा। इस वर्ष कोई भी सूर्य ग्रहण भारत में नहीं पड़ा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस शताब्दी का सबसे लंबा ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा की रात में 11:54 बजे शुरू होगा और 28 जुलाई की तड़के 3. 49 बजे समाप्त होगा। इस ग्रहण की अवधि 2 घंटे 55 मिनट रहेगी। ग्रहण का मध्य काल रात्रि 1. 50 पर होगा। यह ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, इस अवधि में चंद्रमा कई कोणों पर नजर आएगा। खग्रास चंद्र ग्रहण की अवधि दस मिनट रहेगी। यह ग्रहण भारत के अलावा दुनिया के अनेक देशों में नजर आएगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार ग्रहण का सूतक 27 को सवेरे सूर्योदय के साथ लग जाएगा। पूर्ण सूतक ग्रहण की अवधि दस घंटे पहले लगेगा। यह ग्रहण चूंकि अर्द्ध रात्रि में होगा, अत: ग्रहण का स्नान 28 जुलाई की सवेरे तक चलता रहेगा। ग्रहण के समय सभी मंदिर बंद करने की परम्परा है। अर्द्ध रात्रि में ग्रहण होने के कारण मंदिर स्वाभाविक रूप से बंद रहेंगे।
चूंकि चंद्र ग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, अत: लाखों श्रद्धालु धर्मनगरी में मौजूद रहेंगे। ग्रहण पूरा होने के बाद ये श्रद्धालू गंगा में डुबकी लगाकर बहुत तड़के से लौटने लगेंगे। ग्रहण के पूरे कार्यकाल में श्रद्धालू गंगा के तटों पर बैठकर धर्मग्रंथों का पाठ करेंगे और हरि नाम की मालाएं जपेंगे।
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