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विकास के नाम पर न हो वनों का विनाश : जंगली

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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विकास के नाम पर हिमालय के साथ ही वनों का विनाश नहीं किया जा सकता है। यदि वनों को बचाना है तो जनसहभागिता जरूरी है। वनों में आम, आंवला, हर्र, बहेड़ा जैसे पौधों को लगाकर जहां लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर मुहैया कराए जा सकते हैं। वहीं पर्वतीय इलाकों से पलायन को रोकने में भी मदद मिलेगी।
उक्त बातें वनों के संरक्षण के लिए चर्चित जगत सिंह ‘जंगली’ ने मंगलवार को वन विभाग की ओर आयोजित कार्यक्रम में कहीं। इस मौके पर वन विभाग की ओर से ब्रांड अंबेसडर भी घोषित किया गया। ‘जंगली’ ने कहा कि पूरी दुनिया में तेजी से घट रहे जंगलों को जन सहभागिता से ही बचाया जा सकता है। पहले वन विभाग और आमजन के बीच नजदीकियां थीं, लेकिन कई दशकों से दूरियां बढ़ी हैं। पहले जंगलों में आग लगने पर ग्रामीण बचाने के लिए आगे आते थे, लेकिन अब यह परंपरा समाप्त हो रही है। उन्होंने वन विभाग के अफसरों से जंगल की सुरक्षा में लगे ग्रामीणाें को सम्मानित करने का सुझाव दिया। इसके अलावा वनों में मिलने वाली विभिन्न प्रकार की औषधियों व जड़ी बूटियों पर शोध, जंगलों में आम, आंवला, अमरूद, हर्र, बहेड़ा आदि पौधे लगाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण के लिए वनों को संरक्षण जरूरी है। वनों की कटान में नई तकनीक का इस्तेमाल से भी काफी हद तक वन संपदा बचायी जा सकती है। प्रमुख वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष जयराज ने ग्रीन बोनस का जिक्र करते हुए कहा कि यदि देवभूमि के जंगल बचेंगे तो पूरी दुनिया हमारी मदद को आगे आएगी। उन्होंने जंगलों को तबाही से बचाने के लिए जनसहभागिता लेने और मिश्रित वन के बाबत कार्य करने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने ‘जंगली’ के ब्रांड अंबेसडर बनाए जाने पर पर्यावरण संरक्षण में मदद उम्मीद जताई। कार्यक्रम में एपीसीसीएफ राजीव भरथरी, समीर सिन्हा, सीसीएफ बीके गांगटे, बीपी गुप्ता, सुरेंद्र मेहरा, राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर, डीएफओ देहरादून राजीव धीमान, डीएफओ रुद्रप्रयाग मयंक शेखर झा आदि मौजूद रहे।
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डेढ़ लाख पौधे उगाने का है कीर्तिमान
जगत सिंह ‘जंगली’ वनों व पर्यावरण संरक्षण के बेहद संवेदनशील हैं। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित अपने गांव में ‘जंगली’ डेढ़ लाख पौधे लगाकर कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। इस उल्लेखनीय कार्य के लिए ‘जंगली’ को सरकार के अलावा कई संस्थाओं की ओर से सम्मानित किया जा चुका है और कई टीवी चैनलों ने सीरियल भी बनाए हैं।
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