ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
एजेंडा बेस्ड पत्रकारिता आज मीडिया जगत की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। मीडिया पूरी तरह खेमों में बंटा हुआ है। कोई एक-दूसरे की बात सुनने को तैयार नहीं है। पहले से ओपिनियन बनाकर खबरें परोसी जा रही हैं। इससे पत्रकारिता के सामने विश्वसनीयता का संकट भी बढ़ता जा रहा है।
भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली के निदेशक केजी सुरेश ने यह विचार सोमवार को विश्व संवाद केंद्र की ओर से राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित ‘ पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियां’ विषयक संगोष्ठी में रखे। उन्होंने कहा कि आज मीडिया केवल वही खबरें परोस रहा है, जो अच्छे से बेची जा सकती है। खेमेबंदी की पत्रकारिता के कारण आम पाठक और दर्शक इससे दूर होता जा रहा है। इस हृास के लिए पाठक भी जिम्मेदार हैं, जो केवल दो रुपये में अखबार पढ़ना चाहते हैं। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता दून विवि के कुलपति प्रो. चंद्रशेखर नौटियाल ने कहा कि कभी मिशन मानी जाने वाली पत्रकारिता भी आज उद्योग का रूप ले चुकी है। ऐसे में कई तरह की विकृतियां भी आ गई हैं। संगोष्ठी के अध्यक्ष पूर्व राज्यसभा सांसद तरूण विजय ने कहा कि पत्रकारिता को निष्पक्षता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों की ओर लौटना होगा, तभी आमजन में विश्वसनीयता बढ़ेगी। वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड की पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास रहा है। संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार सतीश शर्मा ने किया। इस मौके पर वयोवृद्ध पत्रकार राज कंवर को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अनिल वर्मा, राजेंद्र डोभाल, मनु कोचर, सुरेंद्र मित्तल, विजय कुमार, योगेश अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।