देहरादून। चैत्र नवरात्र कल से प्रारंभ होंगे। मंदिरों और मां दुर्गा पंडालों में भजनों से माहौल भक्तिमय हो उठेगा। नवरात्र के लिए मैया के दरबार और बाजार सज गए हैं। मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित करने के लिए तैयारियों पूरी कर ली गई हैं। शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ ही मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। 14 अप्रैल को नवमी मनाई जाएगी।
सार्वजनिक दुर्गा पंडालों में नवरात्र की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिरों और घरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पूजन सामग्री से शहर के मुख्य बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। मां दुर्गा को चढ़ाई जाने वाली चुनरी से लेकर पूजन सामग्री से दुकानें सज गई हैं। पूजन सामग्री विक्रेता रमेश कुमार ने कहा कि मां को चढ़ाए जाने वाले विभिन्न लाल जोड़े लाए गए हैं। इस बार मां को चढ़ाई जाने वाली चुनरी में विशेष गोटे लगाए गए हैं। पलटन बाजार के पीपल मंडी बाजार में पूजन सामग्री विक्रेता अंजली और कारगी चौक स्थित राज स्टोर के संचालक एडी प्रसाद ने बताया कि पूजन सामग्री की खरीदने वालों की संख्या बढ़ने लगी है।
खाली न चढ़ाएं मां को लाल चुनरी
नवरात्र में मां दुर्गा को केवल चुनरी कभी नहीं चढ़ानी चाहिए। चुनरी के साथ सिंदूर, नारियल, पंचमेवा, मिष्ठान, फल, सुहाग का सामान चढ़ाने से मां खुश होती हैं। मां दुर्गा को चूड़ी, बिछवा, सिंदूर, महावर, बिंदी, काजल चढ़ाना चाहिए। मां को लाल रंग का जोड़ा चढ़ाना शुभ होता है। जबकि अखंड ज्योति के लिए पीतल या मिट्टी के दीये का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। ज्योति के लिए रूई की बत्ती, रोली, सिंदूर, चावल अवश्य रखें। हवन के लिए लौंग का जोड़ा, कपूर, सुपारी, घी, पांच मेवा, चावल रखना शुभ होता है।
नवरात्र में होगी मां के नौ रूपों की पूजा
नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाएगी। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इनको वन्य जीव-जंतुओं का रक्षक माना जाता है। इनकी आराधना से आपदाओं से मुक्ति मिलती है। दूसरे दिन मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की आराधना की जाती है। ब्रह्मचारिणी की पूजा और साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। तीसरे दिन मां दुर्गा की तीसरी शक्ति माता चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाती है। मां चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को भौतिक, आत्मिक, आध्यात्मिक सुख और शांति मिलती है। चौथे दिन मां भगवती दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब कुष्माण्डा देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता की उपासना से बालरूप स्कंद भगवान की उपासना अपने आप हो जाती है। छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। कात्यायन ऋषि के यहां जन्म लेने के कारण माता के इस स्वरूप का नाम कात्यायनी पड़ा। मां दुर्गा की सातवीं शक्ति को कालरात्रि के नाम से जाना जाता हैं। दुर्गापूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना का विधान है। आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। जिनके स्मरण से भक्तों को अपार खुशी मिलती है। इसलिए इनके भक्त अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन और सम्मान करते हुए महागौरी की कृपा प्राप्त करते हैं।
मंदिरों में होंगे विशेष कार्यक्रम
नवरात्र में द्रोणनगरी के मंदिरों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। प्राचीन टपकेश्वर महादेव मंदिर, किनशपुर, कैनाल रोड स्थित प्राचीन शिव मंदिर, श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर, गढ़ी कैंट स्थित नवग्रह शनि मंदिर, बंजारावाला हरिओम आश्रम स्थित दुर्गा मंदिर समेत मंदिरों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। कई स्थानों पर भक्तों ने सार्वजनिक दुर्गा पंडालों भी सजाए जाएंगे।
घट स्थापना के साथ होगा दुर्गा सप्तशती का पाठ
चैत्र नवरात्र में गढ़ी कैंट स्थित माता वैष्णो देवी गुफा योग मंदिर में शुभ मुहूर्त में घट स्थापना करने के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। मां दुर्गा का विशेष शृंगार कर भजन कीर्तन किया जाएगा। देश के विकास और सुख समृद्धि के लिए सामूहिक दीपदान किया जाएगा। मंदिर के संस्थापक आध्यात्मिक गुरु आचार्य विपिन जोशी ने बताया नवसंवत्सर की पूर्व संध्या पर शाम को गांधी पार्क में विश्व शांति और देश के चहुंमुखी विकास व सुख समृद्धि के लिए सामूहिक दीपदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल को अष्टमी व नवमी पर विशेष कन्या पूजन और हवन करने के साथ ही 14 अप्रैल को रामनवमी महोत्सव मनाया जाएगा।