ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
सरकार, शासन और स्वास्थ्य निदेशालय की मंशा के अनुरूप गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय ने जिला अस्पताल के तौर पर काम करना शुरू कर दिया है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि बुधवार को पहले दिन दो गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया गया है। योजना के पहले चरण में अस्पताल में मदर-चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) सेवा के तहत गर्भवती महिलाओं के प्रसव और नवजातों के इलाज की सुविधा शुरू की गई है। इसके अलावा बालरोग, चर्म रोग, मेडिसिन, टीकाकरण, रेडियोलॉजी, पैथालॉजी और फिजियोथैरेपी की सुविधाएं भी मरीजाें को मुहैया कराई जा रही हैं।
दून अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का अस्पताल बनने के बाद राजधानी में जिला अस्पताल की जरूरत महसूस की जा रही थी। पिछले दिनों शासन और स्वास्थ्य निदेशालय के अफसरों के बीच हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय को ही जिला अस्पताल का दर्जा दे दिया जाए। इसी कड़ी में अब गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय में गर्भवती महिलाओं के प्रसव और नवजातों के इलाज के साथ ही कुछ अन्य जरूरी सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं।
सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि आंखों के इलाज के लिए हंस फाउंडेशन की ओर से कई अत्याधुनिक मशीनें मुहैया कराई गई हैं, जो एक सप्ताह के भीतर स्थापित कर दी जाएंगी। मरीजों और तीमारदारों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। मरीजों को उच्चस्तरीय इलाज मुहैया कराने के साथ ही हर बुनियादी सुविधा देने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए योग के साथ ही फिटनेस एक्सरसाइज की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि डॉक्टर स्वस्थ मन से मरीजों की जांच पड़ताल कर सकें।