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ऑनलाइन तबादला काउंसिलिंग-भीतर की खबर- एक क्लिक पर निपट गया

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एक क्लिक पर निपट गया सुगम-दुर्गम का झगड़ा
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
राज्य कर विभाग में मंगलवार को एक क्लिक पर सुगम-दुर्गम का झगड़ा निपट गया। पहले दिन विभाग में चपरासी से लेकर टैक्स अधिकारियों के तबादले ऑनलाइन होने से कोई विवाद नहीं हुआ। पहले दिन के तबादलों की प्रक्रिया रात करीब 11 बजे तक चली। अब बुधवार को डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर स्तर के अधिकारियों के तबादले किए जाएंगे। प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि राज्य के तबादला एक्ट के तहत बिना किसी विवाद तबादले हो गए हैं।
मंगलवार को रिंग रोड स्थित राज्य कर विभाग में वित्त मंत्री प्रकाश पंत और राज्य कर आयुक्त सौजन्या की मौजूदगी में वार्षिक ऑनलाइन तबादलों की ऑनलाइन काउंसिलिंग की गई। इसके तहत तबादलों की परिधि में आने वाले सभी कार्मिकों एवं अधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रिक्त पदों के सापेक्ष विकल्प को ऑनलाइन लॉक किया गया।
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काउंसिलिंग के अंतर्गत तृतीय श्रेणी कार्मिक संवर्ग में सचल दल के लिए, अनिवार्य सुगम से दुर्गम, चिकित्सीय एवं अनुरोध के आधार पर, अनिवार्य दुर्गम से सुगम एवं सचल दल से राज्य कर कार्यालय के लिए कुल 54 पदों पर ऑनलाइन ट्रांसफर की काउंसिलिंग की गई। इसी प्रकार राज्य कर अधिकारी संवर्ग में सचल दल के लिए अनिवार्य सुगम से दुर्गम, चिकित्सीय एवं अनुरोध के आधार पर, अनिवार्य दुर्गम से सुगम एवं सचल दल से राज्य कर कार्यालय के लिए 162 पदों पर काउंसिलिंग देर रात तक जारी थी।
इसके बाद बृहस्पतिवार को सहायक आयुक्त के 30 पदों एवं उपायुक्त के चार पदों के लिए ऑनलाइन काउंसिलिंग की जाएगी। काउंसिलिंग के दौरान अपर आयुक्त कर मुहम्मद नासिर, अपर आयुक्त (विशेष वेतनमान) पीयूष कुमार और संयुक्त आयुक्त अनिल सिंह के साथ ही अन्य अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारी और कर्मचारी संगठनों ने इस पारदर्शी पहल के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वित्त मंत्री प्रकाश पंत एवं आयुक्त राज्य कर का आभार व्यक्त किया।
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छात्रों की तरह कंप्यूटर पर नजरें गड़ाए बैठे रहे अधिकारी-कर्मचारी
राज्य कर विभाग में मंगलवार को इंजीनियरिंग और मेडिकल की काउंसिलिंग जैसा नजारा दिखा। छात्रों की तरह अधिकारी और कर्मचारी कंप्यूटर पर नजरें गड़ाए बैठे रहे। जैसे ही उनका नाम आया तो उनके दिए हुए विकल्पों में से तुरंत एक विकल्प आवंटित हो गया। दाखिलों की काउंसिलिंग की तरह ही यहां भी सीट आवंटन जैसा नजारा था। जिस तरह छात्र भी एक कोर्स के लिए कई-कई कॉलेजों के विकल्प भरते हैं, ठीक वैसे ही अधिकारियों-कर्मचारियों ने अपने तबादले के लिए कई-कई विकल्प भरे हुए थे। इसमें से उन्हें एक ही मिला।
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